बिलासपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

यात्रियों को एलएचबी कोच की परेशानी से अब तक राहत नहीं मिली है। पहले की तरह इस कोच से चलने वाली ट्रेनों के प्लेटफार्म पर आते ही कोच इंडिकेशन बोर्ड के अनुरूप खड़े होने के बजाय अलग- थलग नजर आते हैं। इसके चलते यात्रियों में कोच ढूंढने के लिए अफरा-तफरी मची रहती है। मंगलवार को दुर्ग-जम्मूतवी एक्सप्रेस की स्थिति कुछ इसी तरह थी। कोच के अलावा ओवरफ्लो पाइप से पानी पटरी पर बहने की जगह प्लेटफार्म में बह रहा था। इससे कई यात्री गिरते- गिरते बचे।

रेलवे का यह कोच पुराने से काफी अलग है। इसकी लंबाई सामान्य कोच से दो मीटर अधिक होती है। यह 24 मीटर का होता है। जबकि साामन्य कोच की लंबाई 22.09 मीटर होती है। जोनल स्टेशन में जितने कोच इंडिकेशन बोर्ड लगाए गए हैं वे सामान्य कोच की लंबाई के मुताबिक हैं। एलएचबी की लंबाई अधिक होने के कारण शुरुआत के चार से पांच कोच ही इंडिकेशन बोर्ड के अनुसार खड़े होते हैं। इसके बाद के सभी कोच अलग- थलग रहते हैं। मंगलवार को दुर्ग- जम्मूतवी एक्सप्रेस के कोच की स्थिति भी कुछ इसी तरह थी। प्लेटफार्म में बी-चार कोच खड़ा था पर बोर्ड में एस-वन दिखा रहा था। इसी तरह एस-वन कोच के सामने संकेत एस-थ्री के थे। इतना ही नहीं बोर्ड में पेंट्रीकार नजर ही नहीं आ रहा था। इसके चलते यात्रियों को परेशानी हुई। रेलवे चाहकर भी इसमें बदलाव नहीं कर पा रही है। हालांकि बिलासपुर में एक व्यवस्था बनाई गई थी। इसमें इंजन व जनरल कोच को डिस्प्ले बोर्ड में नहीं दिखाने के निर्देश थे। इससे बाकी के कोच इंडिकेशन के मुताबिक खड़े हो रहे थे। लेकिन यह व्यवस्था भी कुछ दिनों बाद ठप हो गई। दूसरी बड़ी खामी कोच में ओवरफ्लो के बाद निकलने वाला पानी है। यह पाइप सीधे हैं। इसके कारण पानी पूरे फोर्स के साथ प्लेटफार्म में बहता है। इससे यात्रियों को परेशानी होती है।

इसलिए है जरुरी

कोच इंडिकेशन बोर्ड यात्रियों की सहूलियत के लिए लगाए गए हैं। इस इलेक्ट्रिॉनिक बोर्ड के जरिए यात्रियों को दूर से ही यह पता चल जाता है कि प्लेटफार्म में कौन से कोच कहां पर हैं। इस स्थिति को किसी से पूछने की आवश्यकता भी नहीं पड़ती और सीधे जिस कोच में रिजर्वेशन है उसमें बैठ जाते हैं।

टायलेट किनारे बैठकर यात्रा करने की मजबूरी

यात्रियों को अधिक से अधिक सुविधाएं देने का रेलवे चाहे लाख दावे कर ले लेकिन हकीकत तो जम्मूतवी एक्सप्रेस को देखने से पता चलता है। यात्रियों को आज भी सुविधाओं की आवश्यकता है। यह ट्रेन हर मंगलवार को क्षमता से अधिक यात्रियों को लेकर रवाना होती है। इस भीड़ को नियंत्रित करने के लिए यात्रियों के बीच से यह मांग उठी थी कि इसे नियमित चलाया जाए। साथ ही अतिरिक्त कोच की व्यवस्था हो। लेकिन रेल प्रशासन ने कभी भी इसे गंभीरता से नहीं लिया।

जिनका रिजर्वेशन, उनमें आक्रोश

इस ट्रेन में हर मंगलवार को मजदूरों की भीड़ रहती है। वे रोजगार की तलाश में जम्मू की ओर रूख करते हैं। उन्हें न तो रिजर्वेशन कोच की समझ रहती और न ही अन्य जानकारियां। ट्रेन के पहुंचते ही उन्हें जिस कोच में जगह मिलती है उनमें लगेज लेकर चढ़ जाते हैं। इसके चलते जिन यात्रियों का रिजर्वेशन रहता है उन्हें यात्रा करने में परेशानी होती है। स्थिति यह रहती है कि सीट से टायलेट तक जाते नहीं बनता है।