बिलासपुर। जोनल स्टेशन में सोमवार दोपहर 2.30 बजे प्लेटफार्म एक पर ट्रेन प्रवेश किया। इंजन के बाद जो कोच लगा था, उसमें ऊपर दुर्ग- निजामुद्दीन संपर्कक्रांति एक्सप्रेस और नीचे अंत्योदय एक्सप्रेस लिखा था। यह कोच पीछे के कोच से अलग था। ऐसे में यात्री यह सोच में पड़ गए कि आखिर यह कौन सी ट्रेन है। जानकारी लेने पर पता चला कि यह संपर्कक्राति एक्सप्रेस है। इसके बाद ही यात्री इसमें सवार हुए।

पिछले कुछ दिनों से संपर्कक्रांति एक्सप्रेस एलएचबी कोच के साथ चल रही है। इस ट्रेन में अंत्योदय एक्सप्रेस का एक कोच लगा है। हालांकि यह जनरेटर, सामान व गार्ड कोच है। इसे इंजन के बाद लगाया गया था।

ऐसे में रायपुर की ओर से जैसी ही ट्रेन प्लेटफार्म पर पहुंची नागपुर इंड से लेकर हावड़ा इंड तक प्लेटफार्म में जितने भी यात्री खड़े थे उनकी पहली नजर इस कोच पर पड़ी। कुछ पल के लिए वे भ्रमित हो गए। क्योंकि केवल इस कोच को छोड़कर पीछे के सारे कोच अलग व दूसरे रंग में थे।

उद्घोषणा सुनकर स्लीपर व एसी के यात्री तो अपनी बर्थ पर बैठ गए। लेकिन जनरल कोच के यात्रियों के कदम कुछ देर के लिए ठहर गए। उन्हें लगा कि यह अंत्योदय एक्सप्रेस है। इसके बाद यात्री आरपीएफ, जीआरपी व टीटीई से जानकारी लेते हैं। जब स्टाफ ने उन्हें बताया कि यह संपर्कक्रांति एक्सप्रेस है। इसके बाद ही उन्हें भरोसा हुआ।

कोच नहीं था उपलब्ध, इसलिए लगाने की पुष्टि

दरअसल रेल प्रशासन ने वाहवाही लूटने के चक्कर में ऐसा किया है। दरअसल बोर्ड से स्पष्ट निर्देश है कि धीरे- धीरे सभी ट्रेनों को एलएचबी कोच की रैक से चलाई जाए। उन्हें रैक भी उपलब्ध हो गई। लेकिन जनरल कोच नहीं मिल पाया है। लिहाजा अंत्योदय एक्सप्रेस के कोच को निकाल दिया गया।

दूसरी बार लापरवाही

एक ट्रेन में दो नाम के बोर्ड लगे होने का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले 10 अगस्त को भी यात्रियों को इसके चलते परेशानी हो चुकी है। दुर्ग- जम्मूतवी एक्सप्रेस के एक कोच में संपर्कक्रांति एक्सप्रेस का बोर्ड लगा हुआ था। भ्रम की स्थिति होने पर उस समय भी यात्री इंक्वायरी पहुंचकर ट्रेन कंफर्म करते नजर आए।