बिलासपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

उत्तराखंड सरकार देवभूमि में 'हिलटॉप' नामक ब्रांड से शराब का निर्माण कर विदेश में निर्यात कर रही है। साथ ही देश में भी इसका विक्रय किया जा रहा है। हम इसका पुरजोर विरोध करते हैं। शराब की फैक्टरी लगाकर उस भूमि को असुरभूमि न बनाएं। हिमालय में बहु संख्या में दुर्लभ जड़ी-बूटियां उपलब्ध हैं और इसका निर्यात कर करोड़ों डॉलर सरकार के राजस्व में आ सकता है। साथ ही स्थानीय लोगों को रोजगार मिल सकता है।

ये बातें रविवार को चिचिरदा स्थित हरिश शाह के कुंज कुटीर में अपने दो दिवसीय प्रवास के दूसरे दिन ज्योतिषपीठ व द्वारका शारदापीठ के पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कही। चातुर्मास्य व्रत अनुष्ठान के लिए कोलकाता प्रस्थान करने से पूर्व उन्होंने आगे कहा कि आज भारत जैसे धर्मपरायण देश में लोग शराब के नशे में अधर्म के साथ-साथ महिलाओं व बच्चों के साथ दुराचार कर रहे हैं। उनका उत्पीड़न कर रहे हैं और सरकार वही शराब देवभूमि में बना रही है। जो व्यक्ति के मस्तिष्क को खराब कर रहा है। ऐसा होता रहा तो एक दिन देवभूमि, असुरभूमि बन जाएगी। हम सरकार से कहना चाहते हैं कि देवभूमि में धार्मिक लोग साधना करने, जप करने, पूजा करने आते हैं तो उसे देवभूमि ही रहने दिया जाए। शराब फैक्टरी लगाकर देवभूमि को असुरभूमि न बनाया जाए।

एक प्रश्न के जवाब में शंकराचार्य ने कहा कि गौ हत्या बन्द करना तो दूर अपितु विदेश से अत्याधुनिक मशीन की खरीदी पर सरकार सब्सिडी दे रही है। देश के लगभग 100 करोड़ सनातन धर्मियों को चाहिए कि वे गौ हत्या को रोके और गौ माता के लिए गौशाला बनवाए। गाय के गोबर से खाद, कंडे, गौ मूत्र, दूध से घी, मक्खन आदि बनाकर खुद उपार्जन कर सकते हैं। इस पर सरकार को प्रोत्साहित करना चाहिए। इस अवसर पर उनके निज सचिव ब्रह्मचारी सुबुद्धानंद, रायपुर आश्रम प्रमुख ब्रह्मचारी डॉ.इंदुभवानंद, ब्रह्मचारी ज्योतिर्मयानंद, हरीश शाह, शंकराचार्य आश्रम व भगवती राजराजेश्वरी मंदिर के समंवयक सहप्रवक्ता पं.सुदीप्तो चटर्जी, चंद्रप्रकाश उपाध्याय, मंगतराय अग्रवाल समेत बड़ी संख्या में श्रद्घालु उपस्थित थे।