Naidunia
    Monday, December 18, 2017
    PreviousNext

    बायो ब्रिकेट्स फैक्ट्री बंद, घरेलू ईंधन बनाने की योजना फ्लाप

    Published: Thu, 07 Dec 2017 08:25 PM (IST) | Updated: Fri, 08 Dec 2017 12:56 PM (IST)
    By: Editorial Team
    domestic fuel 2017128 125548 07 12 2017

    धमतरी। घरेलू इर्धन में होने वाले प्रदूषण को रोकने के साथ वन प्रबंधन समिति के उत्थान के लिए शुरू की गई बायो ब्रिकेट्स फैक्ट्री वर्तमान में बंद पड़ी है। न तो ग्रामीणों को सस्ते दर में बायो ब्रिकेट्स मिल रहा है और न ही फैक्ट्री को चलाने में समिति दिलचस्पी दिखा रही है। ऐसे में यहां की बायो ब्रिकेट्स फैक्ट्री मात्र शो-पीस बन कर रह गई है।

    ग्रामीण क्षेत्रों में गठित समितियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए वन विभाग ने अनूठी पहल करते हुए नवागांव में 7 साल पहले बायो ब्रिकेट्स फैक्ट्री प्रारंभ की। कुछ समय चलने के बाद वर्तमान में यह फैक्ट्री बंद हो गई।

    बेन्द्रानवागांव (रूद्री) के वन प्रबंधन समिति के अध्यक्ष कन्हैयाराम नागवंशी ने बताया कि आर्थिक रूप से सक्षम बनाने वन विभाग ने बायो ब्रिकेट्स फैक्ट्री चलाने की सलाह दी थी। समिति द्वारा दिलचस्पी दिखाने पर बाकायदा प्रशिक्षण भी दिया गया, पर जिस मशीन से सदस्यों को प्रशिक्षण मिला वह मशीन बड़े आकार की थी।

    यह मशीन सूखे पत्तों व लकड़ी के छिलके से बायो ब्रिकेट्स बनाती थी। बनने वाला कोयला देर तक ताप देता था, पर जब यहां मशीन लगाई गई, वह छोटे आकार की थी। इस मशीन से लकड़ी के छिलके और पत्तों की कटाई नहीं हो पाती।

    इसके लिए लकड़ी का बुरादा और राईस मिल का भूसा और साथ में कंडा बनाने आईल की जरूरत पड़ी। जैसे-तैसे बायो ब्रिकेट्स बनाने के बाद जब मार्केट में लाया गया कंडा कुछ ही पल में जलकर राख होने लगा। घर, होटल में लोगों ने इसका उपयोग करने से इंकार कर दिया।

    आखिरकर उन्हें बायो ब्रिकेट्स फैक्ट्री बंद करनी पड़ी। यहां से तैयार कोयले को बेन्द्रनवांगांव के अलावा सोरम, भटगांव, बेलतरा, नवागांव, श्यामतराई, गंगरेल, रूद्री के ग्रामीण उपयोग करते थे।

    निर्माण बंद होने के बाद सामान भी मिलना बंद हो गया। मालूम हो कि एक किलो बायो ब्रिकेट्स को तीन रुपए किलो में बेचना था, लेकिन आसपास के जंगलों से लकड़ी बायो ब्रिकेट्स से सस्ती साबित हुई। इसलिए योजना फ्लाप हो गई।

    समिति ने काम करना बंद कर दिया

    वन विभाग के एसडीओ केएल निर्मलकर का कहना है कि बेन्द्रानवागांव समिति ने कुछ माह ही फैक्ट्री चलाई। इसके बाद सदस्यों ने इसमें काम करने से इंकार कर दिया। लंबे समय से मशीन खाली पड़ी है। बायो ब्रिकेट्स फैक्ट्री को शुरू करने विशेष प्रयास किया जाएगा। इसके अलावा ग्रामीणों को जागरूक भी करेंगे।

    प्रतिक्रिया दें
    English Hindi Characters remaining


    या निम्न जानकारी पूर्ण करें
    नाम*
    ईमेल*
    Word Verification:*
    Please answer this simple math question.
    +=

      जरूर पढ़ें