रायपुर (राज्य ब्यूरो)। भाजपा ने कांग्रेस और गोंडवाना गणतंत्र पार्टी (गोंगपा) की राह आसान कर दी है। कांग्रेस और गोंगपा के बीच गठबंधन को लेकर काफी समय से बातचीत चल रही है, लेकिन उसमें पाली-तानाखार के विधायक रामदयाल उइके रोड़ा बने हुए थे।

गोंगपा के अध्यक्ष हीरासिंह मरकाम खुद के लिए पाली-तानाखार सीट की मांग कर रहे थे और उइके अपनी सीट छोड़ने के लिए तैयार नहीं हो रहे थे। अब भाजपा ने उइके अपने पाले में लाकर कांग्रेस की राह आसान कर दी है। उइके के कांग्रेस छोड़ते ही कांग्रेस और गोंगपा के बीच गठबंधन की चर्चा फिर से तेज हो गई है।

रामदयाल उइके पाली-तानाखार से कांग्रेस के टिकट पर तीन बार विधायक रहे। उइके का भाजपा में जाना के लिए अप्रत्याशित नहीं है। कांग्रेस नेताओं को पहले से इसकी भनक लग चुकी थी। कांग्रेस, बसपा के साथ गठबंधन नहीं कर सकी, लेकिन अब आदिवासी सीटों में ठीकठाक पकड़ रखने वाली गोंगपा के साथ गठबंधन करना चाहती है।

कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने गोंगपा के सुप्रीमो हीरासिंह मरकाम को चर्चा के लिए मध्यप्रदेश बुलाया था, लेकिन उसके आगे बात अटक गई थी। इसका कारण पाली-तानाखार सीट है। गोंगपा के सुप्रीमो मरकाम भी पाली-तानाखार से चुनाव लड़ते रहे हैं। कांग्रेस से गठबंधन के बाद भी वे इसी सीट से चुनाव लड़ना चाहते हैं। कांग्रेस उइके का टिकट काटने को लेकर पेशापेश में थी। अब कांग्रेस पाली-तानाखार सीट को मरकाम को देकर गठबंधन कर सकती है। नेता-प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव ने कहा है कि कांग्रेस की गोंगपा से चर्चा जारी है।

गोंगपा का दस सीटों पर रहा है प्रभाव

गोंगपा का बिलासपुर व सरगुजा संभाग की भरतपुर-सोनहत, मनेंद्रगढ़, बैकुंठपुर, भटगांव, प्रतापपुर, रामानुजगंज, अंबिकापुर, पाली-तानाखार, मरवाही, कोटा, सक्ती, लैलुंगा, पंडरिया और दुर्ग संभाग की डोंगरगढ़ सीट में प्रभाव है।

मरकाम भी चाहते हैं कांग्रेस से गठबंधन

14 अगस्त को समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और मरकाम की गठबंधन पर चर्चा हुई थी, लेकिन उसके बाद मरकाम ने कहा था कि वे कांग्रेस के साथ गठबंधन करना चाहेंगे। इस कारण सपा से सीट का बंटवारा नहीं किया।

दूसरे आदिवासी नेताओं को पचा नहीं पाए

कांग्रेस ने उइके को पार्टी का प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष बनाया, तो दूसरे आदिवासी नेताओं का भी कद बढ़ाया। जैसे कवासी लखमा को उपनेता प्रतिपक्ष बना दिया। मनोज मंडावी को आदिवासी कांग्रेस प्रकोष्ठ का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष घोषित किया। अमरजीत भगत को आदिवासी कांग्रेस की कमान सौंपी। इससे उइके को लगा कि उनका कद छोटा हो रहा है।

सर्वे के बाद किया साउड, कोर कमेटी में नहीं रखा

पार्टी सूत्रों के अनुसार सर्वे में पाली-तानाखार से उइके की स्थिति कमजोर मिली है। उन्हें मारवाही से चुनाव लड़ाने का संकेत दिया गया था। वे पाली-तानाखार छोड़ना नहीं चाहते थे। इस कारण पार्टी ने उन्हें साइड करने लगी। उइके को उम्मीद थी कि चुनाव के लिए बनी कोर कमेटी में उन्हें लिया जाएगा, लेकिन हाईकमान ने 20 साल बाद कांग्रेस में वापसी करने वाले अरविंद नेताम को रखा।

उइके का जाना, छिटपुट घटना है - पुनिया

उइके को जिनता सम्मान हो सकता था, कांग्रेस ने उतना दिया। उनका जाना छिटपुट घटना है। उससे कांग्रेस को फर्क नहीं पड़ेगा। वैसे भी वे मेहमान से चले गए। पीसीसी अध्यक्ष भूपेश बघेल ने कहा है कि उइके जिस पार्टी में रहे, उनकी सरकार नहीं बन सकी। अब भाजपा में चले गए हैं, तो भाजपा की सरकार नहीं बनेगी। नेता-प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव ने कहा कि कांग्रेस के पास विकल्प की कमी नहीं है। वे जहां थे, वहां का सशक्त विकल्प निराश था, अब उन्हें अवसर मिल सकता है।