0 हाथी प्रभावित क्षेत्रों में सूचना बोर्ड से सावधान करने की पहल

अंबिकापुर । नईदुनिया प्रतिनिधि

हाथियों से होने वाली जनहानि को शून्य करने के लक्ष्य के साथ सरगुजा वनवृत्त में किए जा रहे नवाचार की कड़ी में एक और प्रयास शुरू कर दिया गया है। हाथी विचरण क्षेत्रों में आमजनों को अलर्ट करने का स्थाई बोर्ड लगवाया जा रहा है। इसके माध्यम से यह संदेश दिया जा रहा है कि संबंधित इलाका हाथी विचरण का है, इसलिए इस क्षेत्र में अनावश्यक न जाएं। वनकर्मी व कोटवार की सलाह मानें। हाथियों से बचने का सतर्कता ही बचाव का माध्यम है। बड़े आकार के इन बोर्डों के लग जाने से लोगों को हाथी विचरण क्षेत्र की जानकारी मिल सकेगी और वे स्वयं की सुरक्षा को लेकर सजग हो सकेंगे।

हाथियों से होने वाले जानमाल के नुकसान को कम करने के लिए सरगुजा वनवृत्त में लगातार प्रयास किया जा रहा है। फसलों, मकानों को हाथियों द्वारा क्षति पहुंचाए जाने की स्थिति में ज्यादा से ज्यादा मुआवजा देकर राहत देने की कोशिश की जाती है। लेकिन एक भी जनहानि होने से न सिर्फ पीड़ित परिवार बल्कि वन विभाग को भी गहरा आघात लगता है। वन विभाग द्वारा जनहानि शून्य करने के लिए कई प्रयास किए जा रहे हैं। आकाशवाणी से हमर हाथी, हमर गोठ कार्यक्रम का प्रसारण कर हाथी विचरण क्षेत्र की जानकारी देने के अलावा मैदानी कर्मचारियों को भी प्रभावित क्षेत्रों में तैनात कर हाथियों के मूवमेंट की जानकारी गांव वालों को दी जाती है। एलिफेंट लाइट्स, पक्के मकान, संरक्षित वन क्षेत्रों, हाथी विचरण वाले इलाकों में बेरियर लगाकर भी गांव वालों को यह समझाइश दी जाती है कि जिन जंगलों में हाथियों की मौजूदगी है, उधर वे न जाएं। हाल के दिनों में हाथियों से जनहानि की जो घटनाएं हुई हैं, उसमें कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिसमें हाथी विचरण क्षेत्र से होकर गुजरने के चक्कर में लोग हाथियों के चंगुल में फंसे हैं। ऐसी परिस्थिति फिर से निर्मित न हो, इसे ध्यान में रखते हुए सरगुजा के मुख्य वन संरक्षक केके बिसेन के मार्गदर्शन में हाथी विचरण क्षेत्रों में जनमानस को जागरूक करने अलर्ट का बोर्ड लगवाया जा रहा है। वन विभाग के अधिकारियों का मानना है कि हाथियों का दल जिस क्षेत्र में विचरण करता है, उधर ऐसे बोर्ड लगने से लोगों को जानकारी मिल सकेगी और वे सजग हो सकेंगे। उल्लेखनीय है कि सरगुजा वनवृत्त में लगभग 112 हाथी स्वच्छंद विचरण कर रहे हैं। इसमें तैमोर पिंगला व बादलखोल अभ्यारण्य क्षेत्र में 37, राजपुर वन परिक्षेत्र में तीन, प्रतापपुर व सूरजपुर वन परिक्षेत्र में 57, सीतापुर वन परिक्षेत्र में दो हाथी शामिल हैं।