रायपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। स्वास्थ्य संचालनालय ने देवभोग में मोतियाबिंद ऑपरेशन के बाद दो मरीजों की आंखों की रोशनी कम होने की शिकायत पर राज्य स्तरीय जांच कमेटी का गठन किया था। राज्य अंधत्व निवारण समिति के नोडल अधिकारी डॉ. सुभाष मिश्रा के नेतृत्व में कमेटी ने रायपुर भानसोज स्थित रायपुर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (रिम्स), देवेंद्र नगर स्थित श्री नारायणा हॉस्पिटल, मोवा स्थित श्री बालाजी हॉस्पिटल, ज्ञानदेवी नेत्रालय एवं प्रसूति क्लीनिक देवेंद्र नगर की जांच की।

जांच में मोतियाबिंद सर्जरी के तय प्रोटोकॉल को पैमाना बनाया गया। पाया गया कि रिम्स और श्री नारायणा हॉस्पिटल इनका पालन नहीं कर रहे हैं। एक सर्जन को जहां 10-12 सर्जरी की अनुमति है, वे 20 से अधिक सर्जरी कर रहे हैं। ऑपरेशन के बाद मरीजों का फॉलोअप नहीं किया जा रहा है। यही वजह है कि आंखों में संक्रमण फैल रहा है।

रिम्स कॉलेज अस्पताल और श्री नारायणा हॉस्पिटल में आरएसबीवाई-एमएसबीवाई योजना के तहत छह-छह माह के लिए मोतियाबिंद सर्जरी पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। यह कार्रवाई इनके संचालकों के पक्ष सुनने के बाद स्वास्थ्य संचालक रानू साहू ने की। वहीं श्री बालाजी हॉस्पिटल और ज्ञानदेवी नेत्रालय एवं प्रसूति क्लीनिक को चेतावनी दी गई है कि भविष्य में अगर नियमों का उल्लंघन पाया गया तो सीधे योजना से निष्कासन की कार्रवाई होगी।

मरीज की आंख के अंदर ही गिर गया लैंस- रिम्स मेडिकल कॉलेज में चित्रांग मरकाम की आंख में लगाया गया लैंस आंख के अंदर ही गिर गया था। वहीं मूरलीधर दौरा की आंख के पर्दे में खराबी पाई गई। मरीजों की देख-रेख में अस्पताल द्वारा लापरवाही बरती गई।