रायपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालयों में शिक्षा व्यवस्था में पास-फेल का खेल चल रहा है। एक ओर बीएससी इलेक्ट्रानिक मीडिया के एक छात्र को नियमों का हवाला देकर पास कर दिया गया। वहीं उसके सहपाठी को फेल कर दिया गया। परीक्षा में पास और फेल करने के लिए विश्वविद्यालय ने नियमों का चक्रव्यूह रचा। मामला कुछ यूं है कि विवि प्रबंधन ने कार्यपरिषद की बैठक कर नियम बदल दिए, ताकि फेल हुए कुछ छात्र को आसानी से पास किया जा सके। नए नियम में घोषित किया गया कि 45 प्रतिशत एग्रीगेट के बंधन से छात्रों को मुक्त किया जाता है, लेकिन इसका फायदा केवल एक छात्र को मिला। बाकी छात्रों को पुराने नियम का हवाला देकर पुनः उक्त कक्षा में पढ़ाई करने की बात कही गई।

ये है मामला

बीएससी इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के सेकेंडर सेमेस्टर की परीक्षा मई में आयोजित की गई। परीक्षा के परिणाम जुलाई में घोषित किए गए। विवि प्रबंधन के कुछ करीबी छात्र फेल हो गए। उक्त छात्रों को नियम के विरुद्घ जाकर पुनर्मूल्यांकन करने की अनुमति दी गई। बजाय छात्र 45 प्रतिशत के दायरे से कम था। साथ ही छात्र को प्रथम पुनर्मूल्यांकन में अंक न बढ़ने पर पुनः पुनर्मूल्यांकन की विशेष अनुमति दे दी गई। बावजूद इसके भी छात्र पास नहीं हो सका। इसके बाद कुलपति और कुलसचिव ने कार्यपरिषद की आकस्मिक बैठक में 45 प्रतिशत एग्रीगेट के नियम को ही बदल दिया। करीबी फेल हुए छात्र को पास कर दिया गया।

ये है नियम

पूर्व में केटीयू में सभी विषयों में 40 प्रतिशत और एग्रीगेट 45 प्रतिशत का प्रावधान था। इसके तरह जो भी छात्र परीक्षा में 45 प्रतिशत से कम अंक प्राप्त करता तो उसे फेल की श्रेणी में रखा गय। साथ ही उक्त छात्र को पूनर्मूल्यांकन करने की भी अनुमति नहीं दी जाएगी। इसके अलावा जो छात्र 45 प्रतिशत के ऊपर है और एक विषय में फेल हो जाता है उसे पूनर्मूल्यांकन और एटीकेटी में बैठने का प्रावधान दिया गया था।

प्रस्तावित नियम गोलमाल

नौ अगस्त की 48वीं कार्यपरिषद की बैठक कुलपति की अध्यक्षता में ली गई। बैठक में छात्र हित का हवाले देते हुए नियम में बदलाव किए गए। निर्णय आया कि 40 प्रतिशत प्रत्येक विषय और एग्रीगेट 45 प्रतिशत के नियम को हटाया जाता है। इससे बंधन से छात्रों को मुक्त किया जाता है।

विशेषज्ञों ने बताए प्रावधान

- जो भी नियम बनाए जाते हैं उक्त नियमों को आगामी परीक्षाओं में लागू किया जाता है। पूर्व की परीक्षाओं में नहीं। अन्यथा पूर्व में पास हुए छात्र भी इससे प्रभावित होंगे। केटूयू में जो नियम बनाया गया है उसे पूर्व में हुई परीक्षा में लागू नहीं किया जा सकता, ये व्यक्ति विशेष के हितकारी नियम हो सकता है।

वर्जन

इस मामले की जांच करवाई जाएगी। जो भी नियम आए हैं, वो सभी छात्रों के हित के लिए बनाए गए हैं। कोई भी अनदेखी हुई है तो उसे सुधारा जाएगा। -डॉ. अतुल तिवारी

कुलसचिव, कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, रायपुर