रायपुर। छत्तीसगढ़ में जनसंपर्क विभाग ने बिना टेंडर किए मौखिक आदेश पर 11 लाख रुपये के कप प्लेट की खरीदी कर डाली। यही नहीं, अटल नगर (नया रायपुर) में संवाद (जनसंपर्क विभाग की सहयोगी संस्था) के कार्यालय के उद्घाटन के मौके पर जनसंपर्क विभाग ने चार सौ अतिथियों को 16 लाख का भोजन कराया। यानी एक थाली चार हजार रुपये की पड़ी।

जनसंपर्क कार्यालय में भाजपा की पिछली सरकार के कार्यकाल के घोटाले एक के बाद एक बाहर आ रहे हैं। कांग्रेस की सरकार बनते ही सबसे पहले फर्जी पीआर कंपनियों को करोड़ों का भुगतान करने का मामला सामने आया। इन कंपनियों को ब्लैक लिस्ट किया गया है।

इसके बाद तत्कालीन जनसंपर्क आयुक्त के शाही अंदाज में सरकारी खर्च पर फाइव स्टार होटलों रुकने का मामला सामने आया। अब अटल नगर में संवाद के कार्यक्रम में भ्रष्टाचार का खुलासा हुआ है। इस मामले की जांच शुरू हो चुकी है। बताया जा रहा है कि इसकी जद में जनसंपर्क विभाग के कई अफसर आ रहे हैं। इन सभी पर कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।

जनसंपर्क विभाग ने नया रायपुर अटल नगर में संवाद के कार्यालय का उद्घाटन करने के मौके पर टाटा सिरेमिक लिमिटेड भुवनेश्वर के डिस्ट्रिब्यूटर मेसर्स डेबोनेयर इंडस्ट्रीज को क्राकरी सप्लाई का कार्यादेश जारी किया था। इसके पीछे वजह यह बताई गई थी कि यही डिस्ट्रिब्यूटर प्रदेश के दूसरे शासकीय संस्थानों में भी क्राकरी की सप्लाई कर रहा है।

बाद में डिस्ट्रिब्यूटर में आठ फीसद अतिरिक्त यह कहते हुए चार्ज किया कि उसने क्राकरी के जो दाम बताए थे वे भुवनेश्वर और कोलकाता के लिए थे न कि रायपुर के लिए। जो क्राकरी भेजी गई है उसमें डिनर सेट 18 हजार 500 का, टी सेट 65 सौ रुपये का, सूप सेट 78 सौ रुपये तक का है।

नोटशीट में लिखा है कि इसका उपयोग जनसंपर्क विभाग के अधिकारियों, कर्मचारियों और पत्रकारों के लिए किया जाएगा। हालांकि जब से यह क्राकरी आई है स्टोर रुम में पड़ी हुई है और कर्मचारी पुरानी कपों में चाय पी रहे हैं।

मौखिक आदेश पर हुई भोजन की सप्लाई

संवाद कार्यालय के उद्घाटन के मौके पर रायपुर के फूल चौक स्थित एक होटल को बिना टेंडर के 16 लाख के खाने का भुगतान किया गया। एक कप चाय का दाम 500 रुपये वसूला गया। अधिकारियों का कहना है कि उक्त होटल से पहले भी शासकीय आयोजनों के लिए खाना आता था इसलिए उसे ही आर्डर दिया गया। आयोजन में चार सौ लोग आए थे। यानी एक वयक्ति का खाना चार हजार रुपये का पड़ा।