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    किलकारी गूंजने से पहले दो वर्ष में 2231 बच्चों की मौत

    Published: Thu, 15 Feb 2018 10:28 PM (IST) | Updated: Thu, 15 Feb 2018 10:28 PM (IST)
    By: Editorial Team
    15febambp30 15 02 2018

    0 कुल 7725 जन्मे बच्चों में 7305 का जीवित जन्म

    अंबिकापुर । नईदुनिया प्रतिनिधि

    स्वास्थ्य प्रशासन द्वारा जच्चा-बच्चा की सुरक्षा के लिए उठाए जाने वाले तमाम कदमों के बाद भी सैकड़ों गर्भवती माताएं बच्चों की किलकारी की गूंज सुनने को तरस जाती हैं। संस्थागत प्रसव को प्रोत्साहन देने की तमाम कवायदों के बीच अस्पताल में जन्म लेने वाले बच्चों में से वर्ष भर में एक हजार से अधिक बच्चों का मृत हाल में सामने आना चौंकाने वाला है। बच्चों की मौतों का कारण आम लोगों के लिए भले ही पहेली बना हो, पर चिकित्सालय के जिम्मेदार गर्भवती माताओं की सही देखरेख नहीं होना या खान-पान में बरती गई लापरवाही को मानकर पल्ला झाड़ लेते हैं। जनवरी 2016 से 31 दिसंबर 2017 तक मेडिकल कॉलेज अस्पताल में 2231 बच्चों की मौत हो गई। इस अवधि में कुल 422 बच्चे मृत हाल में जन्म लिए। चालू वर्ष में जनवरी माह में 22 दिनों में 56 बच्चों की मौत हुई, 9 बच्चे मृत हाल में जन्म लिए।

    शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्घ मेडिकल कॉलेज अस्पताल अंबिकापुर में जनवरी 2016 से 31 दिसंबर 2016 तक कुल 3868 बच्चों का जन्म हुआ, जिसमें से 3652 बच्चे जीवित जन्म लिए, 967 बच्चों की मृत्यु हो गई। 218 बच्चे मृत जन्म लिए। इसी प्रकार जनवरी से दिसंबर 2017 तक 3857 बच्चों का जन्म हुआ, जिसमें से 3653 बच्चे जीवित जन्म लिए। 1264 बच्चों की मृत्यु और 204 बच्चे मृत जन्म लिए। ऐसे में गर्भवती माताओं को अस्पताल में भर्ती कर बच्चे की किलकारी सुनने की खुशी धरी रह गई। सरकार की संस्थागत प्रसव को प्रोत्साहित करने की मंशा सुरक्षित प्रसव कराने की रही है। गर्भवती माताओं को बेहतर पोषण आहार मिले, इसके लिए आंगनबाड़ी के माध्यम से गर्भवती, शिशुवती महिलाओं को लाभ मिल रहा है। इनका समय-समय पर टीकाकरण किया जाता है और गर्भवती माताओं की बेहतरी के लिए सोनोग्राफी जांच आदि की निःशुल्क सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। इस कार्य में गांव-गांव में मितानिनें काफी सक्रिय हैं। इन सुविधाओं के बाद भी मौतों के भयावह व चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आना समझ से परे है। कई बच्चों की मौत अस्पताल के गहन चिकित्सा इकाई, एसएनसीयू में हो चुकी है। चिकित्सालय प्रबंधन की तमाम कोशिशों के बाद भी ऐसे हालातों के सामने आने के पीछे एक कारण स्टाफ की कमी भी है। नर्स व कर्मचारियों की कमी बनी रहने से प्रसूताओं को बेहतर चिकित्सा का लाभ नहीं मिल पाता है।

    माहवार जन्म-मृत्यु के आंकड़े

    वर्ष 2016-

    माह कुल जन्म जीवित जन्म मृत्यु मृत जन्म

    जनवरी 321 307 87 14

    फरवरी 270 257 73 13

    मार्च 316 292 94 24

    अप्रैल 385 368 81 19

    मई 307 287 78 14

    जून 346 330 76 16

    जुलाई 304 288 79 16

    अगस्त 298 273 69 16

    सितंबर 347 322 82 25

    अक्टूबर 321 306 89 21

    नवंबर 311 291 65 20

    दिसंबर 342 331 94 20

    कुल- 3868 3652 967 218

    वर्ष 2017-

    माह कुल जन्म जीवित जन्म मृत्यु मृत जन्म

    जनवरी 278 260 113 18

    फरवरी 307 288 112 19

    मार्च 328 290 97 18

    अप्रैल 334 321 93 13

    मई 344 326 91 16

    जून 297 284 96 14

    जुलाई 334 317 108 23

    अगस्त 338 318 102 14

    सितंबर 314 310 109 13

    अक्टूबर 334 313 113 18

    नवंबर 333 317 116 17

    दिसंबर 316 309 114 21

    कुल- 3857 3653 1264 204

    और जानें :  # Childrens death
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