रायपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

विधानसभा चुनाव में आयोग ने टेक्नोलॉजी का बढ़चढ़कर इस्तेमाल किया। इससे चुनाव आचार संहिता का पालन कराने में काफी सहूलियत हुई। स्मार्ट फोन पर सी-विजिल एप, ऑनलाइन शिकायत और कार्रवाई ने चुनावी समर में साम, दाम, दंड, भेद से जीत का तानाबाना बुनने वालों के हर मंसूबे को मात दे दी। पिछले विधानसभा चुनाव की अपेक्षा इस बार आयोग ने नई टेक्नोलॉजी से पार्टी और उनके प्रत्याशियों पर नकेल कसने में कोई कसर नहीं छोड़ी। मतदान के प्रति लोगों को जागरूक करने में सोशल मीडिया सबसे बड़ा हथियार बना। मतदाता जागरूकता के साथ ही मतदान से जुड़े हर सवाल का जबाव देने के लिए फेसबुक लाइव करने में भी मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय पीछे नहीं रहा। हर सप्ताह वोटरों से सोशल मीडिया पर सीधे सीईओ सुब्रत साहू रू-ब-रू हुए। उन्होंने मतदाताओं की हर शंका का समाधान भी किया। इधर, टीवी के अलावा आकाशवाणी के माध्यम से भी वोटरों में बूथ तक जाने की हिम्मत बढ़ाई। संचार के इन माध्यमों से छत्तीसगढ़ के शहरी और ग्रामीण अंचल के साथ ही घोर नक्सली इलाकों में वोट देने के लिए लोगों को प्रेरित किया। नतीजतन शहरी इलाकों की अपेक्षा ग्रामीण अंचलों में 20 से 30 फीसद ज्याद वोट पड़े। हालात ये रहे कि अपने क्षेत्र की विषम परिस्थितियों के चलते लोग मतदान के एक दिन पूर्व ही गांवों से वोट देने के लिए निकल पड़े थे। आदिवासी समाज के मनोबल के आगे नदी, नाले, पहाड़ भी बौने पड़ गए। वे हर गांव से समूह में निकले और वोट देकर लोकतंत्र में भागीदारी निभाई।

इन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल

1-ऑनलाइन वोटर आइडी के लिए आवेदन की व्यवस्था

2-मोबाइल पर मैसेज वोट देने की सूचना

3-सी-विजिल एप से आचार संहिता के उल्लंघन करने नजर

4-सोशल मीडिया का इस्तेमाल

5-हर जिले में वार रूम की स्थापना

6-ऑनलाइन शिकायत सेल

7-वीडियो निगरानी और स्थैतिक दल का गठन

8-मीडिया सेल की स्थापना

9-24 घंटे प्रत्याशियों पर नजर

10-स्वीप कार्यक्रम, फेसबुक पर पोस्ट पर पुरस्कार देने की योजना

11-सर्विस वोटरों को ऑनलाइन डाकमत पत्र भेजे

सुरक्षा ऐसी

1-सुरक्षा में भी टेक्नोलॉजी

2-नक्सल प्रभावित इलाकों पर ड्रोन से नजर

3-मतदान दल के मूवमेंट के लिए एप लांचिंग

--मतगणना स्थल पर प्रोजेक्टर

1-मतगणना स्थल और स्ट्रांग रूम की सीसीटीवी से निगरानी

2-इस बार बदले गए पूर्व के मतगणना स्थल

3-कैम्पस में 24 घंटे वीडियो रिकार्डिंग

4-सुरक्षा व्यवस्था में तीन लेयर में

5-मतगणना स्थल का लाइव एप के माध्यम से अधिकारियों के मोबाइल पर

6-प्रत्याशियों के समर्थकों को मतगणना स्थल पर 24 घंटे रखवाली करने की छूट

--वीवीपैट के सिस्टम से फजीहत भी

ईवीएम में वीवीपैट सिस्टम जुड़ने से मतदान कर्मी ट्रेनिंग में चूके। इसकी वजह से प्रदेश के 56 बूथों पर हुए मॉकपोल को डिलिट नहीं कर पाए। खुद आयोग ने स्वीकार किया कि नई तकनीकी के कारण मतदान कर्मी नहीं कर पाए। ईवीएम की सील खुलने के बाद ऐसे बूथों पर वीवीपैट से मतगणना होगी।