सूरजपुर । नईदुनिया न्यूज

छत्तीसगढ़ लिपिक वर्गीय कर्मचारी संघ जिला शाखा सूरजपुर प्रांतीय निकाय के आह्वान पर भोजनावकाश अवधि में जिले के सैकड़ों लिपिक एकत्रित होकर कलेक्टर सूरजपुर के माध्यम से लिपिकों के वेतन विसंगति दूर करने का ज्ञापन सौंपा। लिपिक संघ ने चरणबद्घ आंदोलन के तहत मांग पूरी नहीं होने पर 8 मार्च को राजधानी रायपुर में आयोजित महारैली में शामिल होने की बात कही है।

ज्ञापन सौंपने के बाद सभी लिपिकों को अवगत कराया गया कि संघ लिपिकों के हित में लगातार प्रयासरत है जिसके तहत मुख्यमंत्री एवं प्रशासनिक सुधार आयोग से समक्ष में कई बार चर्चा कर अपनी उचित मांगों को रखा गया है। मुख्यमंत्री एवं प्रशासनिक सुधार आयोग ने यह तो स्वीकार किया है कि लिपिकों के वेतनमान में विसंगति है एवं आश्वासन भी दिया है। इसी तारतम्य में लिपिक आंदोलन कर शासन से अपनी मांग पूरा कराने का प्रयास कर रहा हैं। मध्यप्रदेश के लिपिकों के लिए मुख्यमंत्री द्वारा वेतन सुधारने की घोषण जनवरी 2018 में किए जाने के कारण छत्तीसगढ़ के लिपिकों को भी आस बंधी है। अध्यक्ष ने बताया कि मध्यप्रदेश से छत्तीसगढ़ की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी है फिर जब मध्यप्रदेश अपने लिपिकों का वेतन सुधारने की मंशा रखता है तो छत्तीसगढ़ को सुधारने में कोई दित नहीं होना चाहिए।

यदि लिपिक संघ हड़ताल पर चला जाता है तो शासन की कई योजनाएं प्रभावित हो जाएंगी क्योंकि लिपिक प्रशासन की रीढ़ की हड्डी है अतएव इनकी मांग शासन को मान लेना चाहिए क्योंकि यदि शासन इनकी मांग मान लेती है तो बहुत ज्यादा वित्तीय भार नहीं पड़ेगा क्योंकि 80 प्रतिशत लिपिक की नौकरी अधिकतम तीन वर्ष से पांच वर्ष बची है। फलस्वरूप नौकरी के अंतिम पड़ाव पर है एवं उनके सेवानिवृत्त होने पर नवनियुक्त लिपिक 20 प्रतिशत है। ऐसी स्थिति में लिपिकों का शासन पर भरोसा है कि इस बार मांग मान ली जाएगी ।