रायपुर। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कोल ब्लॉक आवंटन घोटाला मामले में जायसवाल निको इंडस्ट्रीज लिमिटेड की 101 करोड़ की संपत्ति जब्त की है। इससे पहले ईडी ने जून 2017 में 206 करोड़ की संपत्ति जब्त की थी। ताजा कार्रवाई के बाद जायसवाल निको की बिलासपुर की फैक्ट्री को अटैच कर दिया गया है। ईडी के आला अधिकारियों ने बताया कि मनी लांड्रिंग एक्ट के तहत शुक्रवार को कार्रवाई की गई है। रायपुर की फैक्ट्री को भी अटैच किया जा सकता है।

ईडी के आला अधिकारियों ने बताया कि जायसवाल निको इंडस्ट्रीज लिमिटेड रायपुर और उसके निदेशकों के खिलाफ सीबीआइ ने कोल ब्लाक आवंटन में घपले का मामला दर्ज किया था। इसके आधार पर ही प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लांड्रिंग अधिनियम के तहत मामले की जांच शुरू की।

सीबीआई ने जायसवाल निको के खिलाफ विशेष न्यायाीश, पटियाला हाउस, नई दिल्ली में आइपीसी की धारा 420 और 406 के साथ धारा 120 बी के तहत चार्ज शीट दायर की है। सीबीआइ में दर्ज मामले में रायगढ़ के गारे पाल्मा-सब ब्लॉक 4/4 कोयला ब्लॉक मैसर्स जायसवाल निको इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने धोखाधडी और गलत तरीके से प्राप्त किया था।

कंपनी ने अपने कैप्टिव पावर प्लांट में बिना किसी अनुमति के कोयला खनन किया। ईडी ने जांच में पाया कि कंपनी ने साल 2006-2015 की अवधि में गारे पाल्मा-सब ब्लॉक 4/4, कोयला क्षेत्र से 3.8 मिलियन टन कोयला निकाला था। कंपनी द्वारा इस दौरान भारी मात्रा में शेयर जारी कर लगभग 14 सौ करोड़ रुपये की राशि जमा की गई, जिसका उपयोग अपनी उत्पादन क्षमता और अचल संपत्तियों का विस्तार करने में किया गया।