रायपुर। भूखंड खरीदी के दौरान खासकर प्राइवेट बिल्डर्स के प्रोजेक्ट के कागजात की पूरी जांच-पड़ताल करने के बाद ही राशि जमा करें। अन्यथा भूखंड के पैसे देने के बावजूद प्लाट का आवंटन नहीं होगा। अतिरिक्त जिला उपभोक्ता विवाद परितोषण फोरम रायपुर में ऐसा ही मामला पहुंचा।

रायपुर निवासी परिवादी प्रशांत साहू ने अनावेदक संजय वाजपेयी बिल्डर्स, टू डायरेक्टर योगेश्वर शुक्ला से स्वागत विहार फेस-4 में 1500 वर्गफुट के चार प्लाट 24 लाख रुपये में खरीदे थे। अनावेदक को पूरी राशि देने के बाद भी उसने दो प्लाट की रजिस्ट्री नहीं की। जब परिवादी ने इन प्लाट की राशि वापस मांगी तो ऑफिस के चक्कर लगवाए गए।

अनुबंध के बाद नहीं दिया है दोषी

फोरम के अध्यक्ष बृजेंद्र कुमार शास्त्री, फोरम सदस्य संग्राम सिंह भुवाल ने पूरे प्रकरण की पड़ताल करते हुए निष्कर्ष दिया कि इकरारनामा के अनुसार अनुबंधित भूमि की रजिस्ट्री नहीं कराई गई। राशि वापस नहीं करना, ऑफिस के बार-बार चक्कर लगवाना निश्चित रूप से सेवा में कमी की श्रेणी में आता है।

परिवादी अनावेदकगण को दिए पैसे के संबंध में प्रमाणित करने में परिवादी सफल रहा। इसलिए अनावेदक एक माह के भीतर परिवादी से प्राप्त किए 6,90000 रुपये नौ फीसद व्याज के साथ अदा करे। मानसिक क्षतिपूर्ति के रूप में भी अनावेदक 5 हजार रुपये अदा करेंगे।