दंतेवाड़ा । संचार क्रांति के प्रभाव से कोई अछूता नहीं है। नक्सल प्रभावित गांव के बच्चे भी स्मार्टफोन चला रहे हैं। लेकिन ये फोन का उपयोग पढ़ाई या मनोरंजन के लिए नहीं, नक्सल साहित्य पढ़ने और प्रसार के लिये हो रहा है। इसका खुलासा कटेकल्याण के जियाकोरता पोटाकेबिन छात्रावास में हुआ है। यहां के 15 विद्यार्थियों के पास से मोबाइल फोन जब्त हुए हैं। जिसमें नक्सल साहित्य और नाच गाना शामिल है। ज्ञात हो कि इसी आश्रम के एक छात्र को सीआरपीएफ ने मलेरिया किट और दवाओं के साथ जंगल में पकड़ा था।

शनिवार को सीआरपीएफ बड़ेगुडरा के जवानों की सर्चिंग में बेहद ही चौकाने वाला खुलासा सामने आया, जांच में पोटाकेबिन छात्र के पास से 2 डिब्बे मलेरिया जांच कीट और मोबाइल जवानों के हाथ लगा। जब्त मोबाइल में नक्सलियो के संगठन के गीत और नक्सलियो की तस्वीरें, चेतना नाट्यदल के वीडियो फुटेज मौजूद है। सातवी क्लास के इस छात्र की जानकारी कुआकोंडा पुलिस को देते बच्चे को सीडब्ल्यूसी को सौप दिया है। मामले की पड़ताल करते अन्य बच्चों से पूछताछ में और भी चौकाने वाले तथ्य सामने आए।

बिन बताए घर चले गए बच्चे

पोटाकेबिन अधीक्षक ने जानकारी दी कि पोटाकेबिन में 324 बच्चे आवासीय दर्ज है। जिनमें 8 वी तक के बच्चों की परीक्षा 16 अप्रैल को खत्म हो गयी। जिसके बाद छात्र के परिजन उन्हें छुट्टियों के लिए लेने आने लगे। इन्हें देखकर बिना परिमिशन लिए साप्ताहिक बाज़ार के दिन 35 बच्चे घर चले गए। इनमें वह छात्र भी शामिल था।

शनिवार को नकुलनार साप्ताहिक बाजार के दिन अधीक्षक सब्जियां खरीदने बाजार में पहुँचा हुआ था। तभी ये बच्चे संस्था से चले गए। बताया गया कि महीने भर पहले चेकिंग के दौरान 15 मोबाइल फोन जब्त किए गए थे। जिसे छात्र चोरी-छिपे इस्तेमाल करते थे। यह मोबाइल अधीक्षक के पास जब्त था। जिसे 18 अप्रैल को छात्रों को वापस किया गया है।

फर्स्टएड बॉक्स में रहती थी चाबी

विद्यालय में बच्चो के इलाज के लिए एएनएम नियुक्त है। दवा रखने के लिए आश्रम में एक रूम अलग से है। जहाँ एएनएम बीमार छात्रों का प्राथमिक उपचार एएनएम करती है। एएनएम की माने तो चाबियां फर्स्टएड बॉक्स में ही रहता है और यह बॉक्स इमरजेंसी ट्रीटमेंट के लिए 24 घण्टे खुला रहता है। जिससे 2 डब्बे मलेरिया के कीट गायब हुए है। एक डिब्बे पर 10 फीस कीट रहता है।

"मामले की गंभीरता को देखते बच्चे को सीडब्ल्यूसी को सौप दिया है। साथ आदिवासी विकास विभाग से बच्चों की सही मॉनिटरिंग तथा जानकारी रखते कहा गया है। आश्रम प्रभारी व अन्य बच्चों से भी जानकारी ली जा रही है। - डॉ अभिषेक पल्लव, एसपी, दंतेवाड़ा