दंतेवाड़ा। 'मानों तो भगवान नहीं तो पत्‍थर और कण-कण में बसें हैं भगवान' वाली कहावत आपने सुनी होगी। इन्‍हीं कहावतों को चरितार्थ करती है दंतेवाड़ा जिले के कांवड्गांव स्थित कैलाशपति शिव मंदिर। यहां भगवान शिव की प्रतिमा नहीं एक शिवलिंग के साथ चट्टान है, जिसमें कई शिवलिंग की आक़ति झलकती है।

श्रद्धालुओं ने यहां मंदिर बनाकर शिवरात्रि ही नहीं प्रत्‍येक सोमवार और अन्‍य दिनों में शिवजी की आराधना करते हैं। शिवरात्रि पर यहां पूरे दिन भजन-कीर्तन और भंडारे का आयोजन होता है, जिसमें आसपास के ग्रामीण जुटते हैं।

दंतेवाड़ा जिला मुख्‍यालय के करीब40 किमी दूर ग्राम कांवड़गांव में एक काली मां की मंदिर है। इसी मंदिर से लगा कैलाशपति शिव मंदिर है। इस मंदिर की खासियत है कि यहां शिवजी की एक लिंग तो है साथ एक छोटे चट्टानों का समूह है, जिसमें शिवलिंग की अलग-अलग आकृतियां उभरती है, जिसे पुजारियों ने साज-सज्‍जा के साथ आकर्षक बना दिया है।

इस मंदिर में हमेशा श्रद्धालुओं की भीड़ जुटती है। शिवरात्रि पर विशेष पूजा होता है। सोमवार को भी काफी भीड़ मंदिर में रही। आसपास के ग्रामीण बड़ी संख्‍या में पूजा करने पहुंचे थे। दोपहर के बाद भंडारे का भी आयोजन हुआ।

श्रद्धालुओं का कहना है कि यहां सच्‍चे मन से मांगी गई मुरादें पूरी होती है। इसी आस्‍था और विश्‍वास से हर साल शिवरात्रि पर भक्‍तों की भीड़ बढ़ रही है। संवेदनशील गांव होने के बावजूद इस मंदिर में दंतेवाड़ा के अलावा बस्‍तर जिले से काफी संख्‍या में लोग दर्शन और पूजा- अर्चना के लिए पहुंचते हैं।