दंतेवाड़ा। नईदुनिया प्रतिनिधि

बदलते जीवनशैली और खानपान ने अब ग्रामीणों को भी हाइपरटेंशन का शिकार बना लिया है। छोटी- छोटी बातों पर लोग गुस्सा करने लगे हैं। यही वजह है कि जिले में ब्लड प्रेशर के मरीजों का प्रतिशत 20 से अधिक है। हास्पिटल पहुंचने वाले मरीजों में 6 प्रतिशत शुगर के मरीज होते हैं। शुक्रवार को जिला हास्पिटल में लगे शिविर में शुगर के 18 और हाइपरटेंशन (उच्च रक्तचाप) के 33 मरीज मिले। इनमें कुछ विशुद्ध ग्रामीण परिवेश के किसान हैं। डॉक्टरों का कहना है कि यह बदलते लाइफ स्टाइल और खानपान का परिणाम है। अनियमित खानपान और रेडिमेड फूड से भी लोग हाइपरटेंशन के शिकार हो रहे हैं।

जिला हॉस्पिटल के एमडी डॉ संजय बघेल कहते हैं कि जिले में साग-सब्जी और धान की उपज तो जैविक खाद से हो रही है लेकिन आधुनिक होते बच्चे और अभिभावक रेडिमेड फूड का उपयोग ज्यादा कर रहे हैं। इससे भी ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियां हो रही हैं। शुगर जैसी बीमारी पहले एक उम्र विशेष पर होती थी लेकिन अब 5-10 साल के बच्चे भी पीडि़त पाए जाते हैं। इसके लिए आनुवांशिकता के साथ बाजार में उपलब्ध रेडिमेड खाद्य सामग्री भी जिम्मदार है। डॉक्टर के मुताबिक एक सामान्य व्यक्ति को एक दिन में अधिकतम 6 ग्राम नमक का सेवन करना चाहिए। इससे ज्यादा नमक उच्च रक्तचाप को निमंत्रण देता है। होटल में लोग नमकीन और कचौरी-समोसे के साथ चिप्स और दीगर नमकीन की वस्तुओं का सेवन शौक से करते हैं। इनमें नमक की मात्रा सामान्य से ज्यादा होती है। इसके अलावा, यह एक ही तेल में बार-बार तले जाते हैं। इससे ट्रांसफेट बनता है जो शरीर में पहुंच जाता है। शुक्रवार को लगे शिविर में 345 मरीज जांच के लिए पहुंचे थे। जिन्हें हाइपरटेंशन और शुगर का शिकार पाया गया, उन्हें नियमित दवा लेने और चेकअप के साथ सतर्कता बरतने की सलाह दी गई। वहीं अन्य को भी बीमारी से बचने सतर्क रहने कहा गया है। शिविर में प्रभारी सीएमएचओ डॉ गौतम कुमार, डॉ शिवेंदु मुखर्जी, डॉ अमन मोहन के साथ अन्य स्टाफ का सहयोग रहा।

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