योगेंद्र ठाकुर, दंतेवाड़ा। छत्तीसगढ़ में सरकार बदलने के साथ ही नक्सल प्रभावित जंगल में भी बदलाव की बयार बहने लगी है। नक्सलियों के खिलाफ रणनीति तैयार करने के लिए जुटे अफसरों ने लाल आतंक खत्म करने के लिए नया रास्ता निकाला है।

अब तक नक्सली घटनाओं में शामिल छोटे नक्सलियों को भी गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया जाता था। इसकी जगह अब इन्हें समझाकर मुख्यधारा से जोड़ने की रणनीति बनाई गई है। इससे आदिवासियों के बीच सरकार और पुलिस के प्रति विश्वास पनपेगा, वहीं प्रताड़ना के आरोपों से भी सुरक्षा बल को मुक्ति मिल जाएगी।

बड़े नक्सलियों को छूट नहीं

पुलिस के बड़े अधिकारी यह छूट बड़े नक्सली नेताओं को देने के पक्ष में नहीं हैं, वे हमेशा की तरह सुरक्षा बल के निशाने पर रहेंगे और मौका मिलते ही उन्हें घेरा जाएगा। नई रणनीति से बड़े नक्सली लीडरों की कमर टूट जाएगी और माना जा रहा है कि वे भी सरेंडर करने के लिए बाध्य हो जाएंगे।

हेल्थ और समाज कल्याण के कैंप बढ़ाएंगे

दंतेवाड़ा की पुलिस अब जंगल के भीतर स्थित गांवों तक जाएगी। वहां स्वास्थ्य और सामाजिक शिविरों का आयोजन किया जाएगा। साथ ही इलाके के स्कूलों व आश्रमों में बधाों से खेलकूद करवाया जाएगा। गांव की आवश्यकता समझी जाएगी और प्रशासनिक मदद से इसे पूरी की जाएगी।

दंतेवाड़ा में ही 125 जेल में

केवल दंतेवाडा जिले की ही बात करें तो यहां सालभर के भीतर 125 आदिवासियों को नक्सली होने के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है जबकि केवल दस नक्सलियों ने सरेंडर किया है।

चलाएंगे विकासपरक स्मार्ट ऑपरेशन

जिले में नक्सलियों के खिलाफ फिलहाल बड़ी मुहिम नहीं चल रही है। सरकार की मंशानुसार जिले में विकासपरक स्मार्ट ऑपरेशन चलाया जाएगा, जिसमें नक्सलियों के बड़े लीडर टारगेट पर होंगे। गांव वालों की मदद से जनमिलिशिया और छोटे सहयोगियों को सरेंडर कराकर मुख्य धारा में जोड़ने की कोशिश की जा रही है।

- डॉ अभिषेक पल्लव, एसपी दंतेवाड़ा