दंतेवाड़ा/ किरंदुल। मुठभेड़ के बाद खेत में घायल मिले नक्सली को जवानों ने हॉस्पिटल पहुंचाकर मानवता का धर्म निभाया। मानवता का यह चेहरा गुरुवार को किरंदुल थाना क्षेत्र के समलवार-मड़कामीरास के जंगल में जंगल में नजर आया। जहां बीती रात डीआरजी के जवानों का मुठभेड़ नक्सलियों के साथ हुआ था। किरंदुल हॉस्पिटल में भर्ती नक्सली फिलहाल खतरे से बाहर है। उसके जांघ में गोली लगी थी।

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक मलांगिर एरिया कमेटी के बड़े नक्सलियों की सूचना पर डीआरजी के करीब 200 जवान बुधवार की रात सर्चिंग पर निकले थे। रात करीब 10-11 बजे ग्राम समलवार- मड़कामी रास के जंगलों में मीटिंग कर रहे नक्सलियों ने फोर्स पर फायरिंग शुरू कर दी। लेकिन खुद को कमजोर पाते अंधेरा और जंगल का फायदा उठाते फरार हो गए।

फोर्स रात को जंगल में ही डेरा डाले थी और सुबह फिर आगे बढ़ी तो जंगल के बीच एक खेत के मेढ़ में एक व्यक्ति घायल मिला। जवानों को देखते ही गोली नहीं मारने की गुहार लगाते खुद को पेड़ से गिरकर घायल होना बताया। लेकिन जब जवान उसके जख्म को देखा तो वह गोली का था। बावजूद जवानों ने उसे उठाकर हॉस्पिटल ले गए।

इस बीच उसकी शिनाख्त मलांगिर एरिया कमेटी मेंबर भीमा मड़कामी के रुप में हुई। हॉस्पिटल पहुंचने के बाद उसने स्वीकार किया कि रात को जंगल में अन्य नक्सली लीडर मीटिंग कर रहे थे। वह कुछ अन्य साथियों के साथ संतरी ड्यूटी पर था। जब गोली लगी तो उसका 12बोर बंदूक नक्सली ले गए और उसे वहीं छोड़ दिया।

पुलिस ने पेश की मिसाल

एसडीओपी धीरेंद्र पटेल ने जवानों जाबांजी के साथ मानवता की तारीफ करते कहा कि फोर्स कभी भी किसी पर हमला नहीं करता। जब फोर्स पर हमला होता है तो वह बचाव में फायर करती है। इस मामले में जब जवानों को नक्सली घायल मिला और शिनाख्ती हो गई।

बावजूद उसके कांधे पर उठाकर जवान 15 किमी पहाड़ी रास्ते से चलकर हॉस्पिटल पहुंचाया। यह जवानों की मानवता की मिसाल है। नक्सली और उनके समर्थक हमेशा जवानों की झूठी कहानियां सुनाकर लोगों को भ्रमित करते हैं। घायल नक्सली खतरे से बाहर है। उसका उपचार चल रहा है।