दंतेवाड़ा। जिले के 11 प्रतिभावान विद्यार्थी देश की प्रतिष्ठित परीक्षा जेईई मेंस क्लीयर कर अब एडवांस एक्जाम की तैयारी कर रहे हैं। इनमें एक विद्यार्थी इंद्रावती नदी पार नक्सल प्रभावित माड़ इलाके के चेरपाल गांव का है। छू लो आसमान संस्था में रहकर पढाई कर रहा छात्र संतुराम कुंजाम की कहानी किसी फिल्मी से कम नहीं है।

वह जब पांच साल का था तब दिव्यांगता के चलते पिता ने मां के साथ उसे घर से बेदखल कर दिया था। आंखों में खुशी और संघर्ष के आंसुओं के साथ उसने नईदुनिया को अपनी दर्द भरी कहानी सुनाई। वह बताता है कि पांच साल का था तो पिता ने छोड़ दिया। जैसे-जैसे बड़ा हो रहा था समझ भी बढ़ रही थी। दिव्यांगता भी जीवन को झकझोर रही थी, लेकिन हार नहीं मानी। बचपन में ही मां ने दूसरी शादी कर ली और पास के गांव में चली गई। हां मां साथ लेकर गई। स्कूल जाना चाहता था लेकिन मां ने गाय-बैल चराने के लिए कहा। मन मारकर मवेशी चराने लगा। स्कूल में पढने नहीं जाता था, लेकिन किताबों को साथ लेकर मवेशियों को चराता था।

चाचा ने यह सब देखा तो वे अपने साथ लेकर आ गए। उन्होंने पढाने का फैसला लिया। मन लगा कर पढ़ा। पढते देख और क्लास में हर बार अव्वल आया। मां को भी लोग बताते रहे तो उन्होंने भी पढाई के लिए पैसा भेजना शरू कर दिया। इधर स्कूल से लेकर छू लो आसमां संस्था के शिक्षक भी पढ़ाई के साथ रोजमर्रा की जरूरतों को पूरी करते हैं।

पूरा परिवार लाल आतंक के दहशत में था, भेज दिया हॉस्टल

जिले के प्रतिभावनों को नक्सल दहशत भी कामयाबी के परचम लहराने से नहीं रोक पा रहे। जेईई मेंस क्लीयर करने वाले में जिले की तीन छात्राओं में में एक तारिका गावड़े लाल आतंक के साए से बाहर निकलकर बाहर आई है। उसके दादा चंदरूराम की नक्सलियों ने हत्या कर दी थी। पूरा परिवार दहशत में था। नक्सलियों ने उनको सिर्फ इसलिए मार डाला, वे गांव में स्कूल- हॉस्पिटल बनवाना चाहते थे। उनके सपनों को पूरा करने तारिका के पिता ने अपनी होनहार दो बेटी और एक बेटे को हास्टल में भर्ती कर दिया। आज तारिका जेईई की मेंस क्लीयर कर एडवांस परीक्षा की तैयारी में जुटी है। दसवीं तारिका ने 82 प्रतिशत से अधिक अंकों से पास किया है। बारहवीं में 90 प्रतिशत से अधिक अंक की उम्मीद कर रही है।

पढाई में ज्यादा वक्त देती है तारिका

तारिका के साथ छू लो आसमां की छात्राएं खेलकूद में कम और पढाई में ज्यादा वक्त देती हैं। तारिका बताती है कि क्लास सुबह 8 से शाम 5 बजे तक चलता है। बीच में लंच और रेस्ट के लिए एक घंटे की छुटटी मिलती है। इसके बाद रूम में ग्रुप और सिंगल स्टडी सुबह और रात में करते हैं।

बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए संस्था कटिबद्ध

छू लो आसमां एक आवासीय संस्था है। छात्र और छात्राओं के लिए दो अलग- अलग गांव में भवन बनाया गया है। जहां शिक्षकों के लिए भी आवासीय सुविधा है। बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए पढाई के साथ खेलकूद, सांस्कतिक कार्यक्रम भी कराए जाते हैं। प्रशासन की ओर से शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे अभिभावक और विदयार्थियों को आर्थिक बोझ नहीं होने वे निश्चितता से अध्ययन में ध्यान केंद्रित रखते है। कोर्स की पढाई के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी संस्था कराती है। बीच-बीच में विशेषज्ञ शिक्षक आते रहते हैं। इसका सुखद परिणाम लगातार मिल रहा है।

- कृष्णा गावड़े ,संस्था प्रभारी, छू लो आसमां