जगदलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। वनों से भरे छत्तीसगढ़ के बस्तर में वन विभाग जलाऊ तो दूर लोगों को शवदाह के लिए भी लकड़ी उपलब्ध नहीं करा पा रहा है जिसकी वजह से समाज की सदियों से चली आ रही परम्पराओं में बदलाव आने लगा है। जिले के बकावंड ब्लॉक के ग्राम पाहुरबेल निवासी कम्मू चन्द्राकर की मृत्यु शुक्रवार को होने पर शवदाह के लिए वन विभाग के एक भी डिपो में जलाऊ लकड़ी उपलब्ध न होने के कारण उसे समाज की मंत्रणा के पश्चात दफनाया गया।

समाज के वरिष्ठ पदाधिकारी जोगेन्द्र चन्द्राकर ने कहा कि सिर्फ बकावंड ही नहीं जैतगिरी, करपावंड, मूली, सरगीपाल किसी भी वन विभाग के उपभोक्ता एवं निस्तार डिपो में बरसात के पहले से जलाऊ उपलब्ध न होने से लोगों को शवदाह के लिए बड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

इससे सामाजिक परंपराएं टूट रही हैं और लोगों में व्यवस्था को लेकर काफी आक्रोश है। जनपद में शिक्षा समिति के पूर्व सभापति जितेन्द्र पानीग्राही ने बताया कि इस संबंध में जब रेंजर से मोबाइल पर चर्चा की तो उन्होंने जलाऊ उपलब्ध कराने में असमर्थता जताते हुए पास के ही किसी जंगल से शवदाह के लिए लकड़ी काट लेने की सलाह दी पर पाहुरबेल सहित दर्जनों गांव ऐसे भी हैं जहां आस-पास कोई जंगल है ही नहीं।

विभागीय सूत्रों के अनुसार बरसात के मौसम के बाद जंगल में कूप कटाई होती है तब जाकर डिपो में जलाऊ लकड़ी पहुंचती है। बरसात में कूप कटाई पर प्रतिबंध रहता है। कूप कटाई के नये आदेश आते ही डिपो में जलाऊ लकड़ी उपलब्ध रहेगी। गांव ही नहीं शहर मुख्यालय में मुक्तिधाम के लिए खड़कघाट डिपो में भी लकड़ी की किल्लत लंबे समय से बनी हुई है जो लकड़ियां उपलब्ध हैं उसे शवदाह के योग्य बनाने मजदूर लगाने पड़ रहे हैं।