बैकुन्ठपुर । जिला अस्पताल बैंकुठपुर में अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही के कारण एक नवजात डिलेवरी के दौरान डस्टबिन में गिर गया। ज्यादा चोट आने से कुछ देर बाद उसकी मौत हो गई। प्रसूता के परिजनों ने यह आरोप लगाते हुए जिले के कलेक्टर नरेन्द्र कुमार दुग्गा से न्याय की गुहार लगाई है।

मिली जानकारी के अनुसार जिले के चिरमिरी पोडी निवासी नसरीन बेगम प्रसूता की मां अफरोज बेगम ने बताया कि सुरक्षित प्रसव हो, इसके लिए वो अपनी बेटी नसरीन को सुरक्षित प्रसव के लिए गुरुवार 11 अक्टूबर की देर रात 4 बजे इस उम्मीद से जिला अस्पताल बैकुंठपुर में भर्ती कराया था कि इस बार उनके घर में बच्चे की किलकारी गूंजेगी, लेकिन 12 अक्टूबर शुक्रवार को सुबह 10 बजे तेज दर्द होने पर वो अपनी बेटी को प्रसव कक्ष में ले गई।

इस दौरान मौके पर मौजूद नर्स ने उसे स्लाईन की पाईप मेडिकल स्टोर से लाने के लिए भेज दिया। जब तक मैं पाईप लेकर आई तब तक बच्चा प्रसव कक्ष में रखे डस्टबीन में गिर चुका था। प्रसूता की उसकी मां का कहना है कि इस दौरान प्रसव कक्ष में न तो नर्स थी और न ही डॉक्टर।

गौरतलब हो कि यह जिला अस्पताल बैकुंठपुर में इस प्रकार का पहला मामला नहीं है। जब इस तरह की घटना घटी हो बल्कि 11 फरवरी 2018 को भी इसी प्रसव कक्ष में सुनीता नाम की महिला का बच्चा भी प्रसव के दौरान अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही के कारण डस्टबीन में गिरने के कारण बच्चे की मौत हो चुकी है।

इसके बाद भी जिला अस्पताल प्रबंधन की आंख नही खुली है। इस संबंध में जब हमने अस्पताल प्रबंधन से इसकी जानकारी लेनी चाहिए तो कोई भी कुछ भी करने को तैयार नहीं हुआ। अस्पताल में मौजूद नर्सों से पता करने पर उन्होंने बताया कि इस दौरान अस्पताल में डॉक्टर शिखा सोने ड्यूटी पर थी । हमने शिखा सोनी से संपर्क करना चाहा किंतु उनसे संपर्क ना हो सका। जिला अस्पताल पर

प्रबंधक डॉक्टर सुनील गुप्ता का इस संबंध में कहना था कि मुझे इस मामले की जानकारी नहीं है, मैं पता कर मामले की जांच कराऊंगा। उसके बाद ही कुछ कह पाऊंगा। वहीं पर जब हमने जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. शिवपाल सिंह पैकरा से इस संबंध में बात की तो उन्होंने भी कहा कि मैं पहले मामले की जांच कराऊंगा। इधर प्रसूता की मां का कहना है कि हमें इस संबंध में न्याय चाहिए और डॉक्टर व स्टाफ द्वारा लापरवाही की गई है, उसे इसकी सजा मिलनी चाहिए।