धमतरी। प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री अजय चंद्राकर के गृह जिला के सबसे बड़े जिला अस्पताल में एक भी सर्जन नहीं है। पेट में अल्सर से पीड़ित व्यक्ति की ऑपरेशन नहीं होने से मौत हो गई। निजी अस्पताल में ऑपरेशन के लिए स्मार्ट कार्ड नहीं चलने और 50 हजार रुपये की डिमांड डॉक्टरों द्वारा करने के बाद वृद्घ को जिला अस्पताल रेफर किया गया था।

सीमावर्ती बालोद जिले के ग्राम गुरूर ब्लाक के ग्राम दुपचेरा निवासी दरियाव राम साहू पिता पचकौड़ राम के पेट में अल्सर हो गया था। पुत्र होमराज साहू ने उसे जिला अस्पताल धमतरी में भर्ती कराया था, लेकिन सर्जन के अभाव में उसे शहर के एक निजी अस्पताल में रेफर कर दिया गया। प्रधानमंत्री आयुष्मान योजना के लांच होने के कारण निजी अस्पताल में स्मार्ट कार्ड नहीं चला, क्योंकि साफ्टवेयर अपडेट किया जा रहा है।

डॉक्टरों ने उपचार व ऑपरेशन के लिए उनसे 50 हजार रुपये की मांग की। रुपये के अभाव में वृद्घ का आपरेशन नहीं हो सका। निजी अस्पताल के सामान्य वार्ड में उपचार के नाम पर एक दिन के लिए 8 हजार 500 रुपये नगद लिया गया। रुपये खत्म होने पर निजी अस्पताल से उसे 19 सितंबर की रात 10.30 बजे रेफर कर दिया गया।

भारी मशक्कत के बाद उसे उसी रात जिला अस्पताल में भर्ती लिया गया, जहां बिस्तर फुल होने के कारण उसे स्ट्रेचर पर ही रखकर उपचार किया गया। डॉक्टर से गुहार लगाने के बाद उसे बाद में वार्ड में बिस्तर मिला। लेकिन जिला अस्पताल में एक भी सर्जन डॉक्टर नहीं होने से वृद्घ का समय पर ऑपरेशन नहीं हो पाया।

अन्य डॉक्टर सामान्य उपचार करते रहे। जबकि ऑपरेशन उसकी जान बचाने के लिए जरूरी था। समय पर ऑपरेशन नहीं होने के कारण 22 सितंबर शनिवार की रात करीब 9.30 बजे दरियाव राम साहू की मौत हो गई।

23 सितंबर को उनके पुत्र होमराज साहू ने नईदुनिया को चर्चा में बताया कि जिला अस्पताल में सर्जन नहीं होने से उनके पिता के अल्सर का समय पर ऑपरेशन नहीं हुआ, जिससे उनकी मौत हो गई। राज्य सरकार जिस स्मार्ट कार्ड को लोगों के लिए जीवनदायिनी बताता है, उससे उपचार नहीं हो पाया। निजी अस्पताल में स्मार्ट कार्ड से उपचार करने से अस्पताल संचालक ने स्पष्ट मना कर दिया।

स्मार्ट कार्ड चलता तो पिता आज जिंदा होते

उसने रूआंसे स्वर में कहा कि यदि स्मार्ट कार्ड चलता, तो आज पिता जिंदा होते। प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री के गृह जिला होने के बाद भी धमतरी में स्वास्थ्य सुविधा का बुरा हाल है। ऐसे में प्रदेश के अन्य जिलों में स्वास्थ्य सुविधा का क्या स्थिति होगी, यह अंदाजा लगाया जा सकता है।

आज रुपये और डॉक्टर के अभाव में पिता की मौत हुई है, इसके लिए बदहाल स्वास्थ्य सुविधा, स्वास्थ्य मंत्री और स्वास्थ्य विभाग के उच्च पदों पर बैठे अधिकारी ही जिम्मेदार है। क्योंकि स्मार्ट कार्ड नहीं चलने से उपचार नहीं होने पर उन्होंने 104 नंबर डायल कर स्वास्थ्य संबंधी जानकारी ली थी।

सीएमएचओ को स्मार्ट कार्ड से उपचार नहीं होने की भी जानकारी दी गई थी, इसके बावजूद भी कोई कदम नहीं उठाया गया। यदि स्वास्थ्य विभाग चाहता तो उपचार व ऑपरेशन हो सकता था, लेकिन किसी ने उनकी समस्या को गंभीरता से नहीं लिया।

शासन को लिखा गया है पत्र

अस्पताल में एक भी सर्जन नहीं है। जरूरतमंद मरीजों का समय पर ऑपरेशन नहीं हो पाता। सर्जन के लिए शासन को पत्र लिखा गया है, लेकिन शासन के द्वारा एक भी सर्जन की पदस्थापना नहीं की जा रही है। - डॉ पीसी ठाकुर, सिविल सर्जन धमतरी

लोगों को मारने के लिए खोला है अस्पताल

लोगों को मारने के लिए अस्पताल खोला है, डॉक्टरों की व्यवस्था नहीं है। स्वास्थ्य मंत्री के गृह जिला में एक भी सर्जन नहीं होना दुर्भाग्य की बात है। स्वास्थ्य मंत्री अपने ही जिला में एक सर्जन की व्यवस्था नहीं करा पा रहे हैं। उन्हें लोगों की कहां चिंता है। कोई डेंगू से मर रहा है, तो कोई आंख के गलत ऑपरेशन से मर जाता है। - भूपेश बघेल, प्रदेशाध्यक्ष कांग्रेस

दवा से ज्यादा दारू से मतलब

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को विकास यात्रा में छत्तीसगढ़ की जनता को विकास दिखाने स्वास्थ्य मंत्री के गृह जिला के जिला अस्पताल से हरी झंडी दिखाना चाहिए कि वास्तव में धरातल में क्या चल रहा है। हवा में तो आसमान दिखा रहे हैं। सरकार भ्रष्टाचार, कमीशनखोरी में व्यस्त है। जनता की सेवा करने उनके पास समय नहीं है। सरकार को कहां शराब दुकान चलाना है। कहां से कमीशन व आय मिलना है, इसकी ज्यादा चिंता है। दवा से ज्यादा दारू की चिंता सरकार को है। - आनंद पवार, प्रदेश सचिव कांग्रेस

मौत के लिए स्वास्थ्य मंत्री जिम्मेदार

स्वास्थ्य मंत्री के गृह जिला के सबसे बड़े जिला अस्पताल में सर्जन नहीं होना दुर्भाग्य की बात है। उपचार व ऑपरेशन के अभाव में मौत के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय व उस विभाग के मंत्री जिम्मेदार है। मृतक के परिवार को लाखों व करोड़ों देने से भी क्षति की पूर्ति नहीं होती है। रुपये के अभाव में उपचार नहीं होने से किसी की मौत हुई है,यह निंदनीय है। सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए। जिला अस्पताल में तत्काल सर्जन व विशेषज्ञ डॉक्टरों की पदस्थापना की जाए। - दिग्विजय सिंह कृदत्त, प्रदेश उपाध्यक्ष जोगी कांग्रेस

मंत्री ने कॉल रिसीव नहीं किया

प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री अजय चंद्राकर से जिला अस्पताल में एक भी सर्जन नहीं होने के संबंध में नईदुनिया ने उनसे जानकारी चाहने के लिए संपर्क किया। उनके मोबाइल नंबर 9893633000 पर 23 सितंबर की शाम 6.30 बजे, 6.31 बजे और 6.57 बजे कॉल किया गया। कॉल जाने के बाद भी उन्होंने रिसीव नहीं किया।