धमतरी। सावन माह में हुई झमाझम बारिश से निचले खेतों में पानी भरने से किसानों पर पहाड़ टूट पड़ा है। तीन से चार दिन तक लगातार धान के पौधों के पानी में डूबे होने से वे जमीन पर लेट गए हैं। जिन खेतों से पानी बाहर नहीं निकल पाया है, वहां के पौधे सड़ने लगे हैं। यह स्थिति देखकर किसान माथा पीट रहे हैं।

जिला मुख्यालय धमतरी से लगे ग्राम पंचायत मुजगहन, लोहरसी, रत्नाबांधा और पोटियाडीह के कई किसानों के धान फसल मुख्य निकासी पुल व उसके बहाव क्षेत्र में है, जहां किसान धान फसल लेते है। आषाढ़ व सावन माह तक उनके खेतों में धान फसल लहलहा रही थी, लेकिन सावन माह के अंतिम सप्ताह में हुई झमाझम बारिश इन किसानों के धान फसल पर पहाड़ बनकर टूटा।

भारी बारिश से धान फसल के पौधों के ऊपर दो से तीन दिन तक पानी का तेज बहाव चला। फसल पानी में डूबी रही। समय पर खेतों से पानी नहीं निकलने के कारण धान के पौधा जमीन में लेट गए हैं। पानी में डूबने से पौधों की हरियाली गायब हो गई है।

लेटी फसल के ऊपर अभी भी पानी भरा हुआ है, जिससे पौधे सड़ने लगे हैं। क्षेत्र के प्रभावित किसानों का कहना है कि बारिश थमे तीन दिन से अधिक हो गया है, लेकिन नुकसान का सर्वे करने गांव में न कृषि विभाग के अधिकारी पहुंचे और न ही राजस्व अमला।

आंकलन कर मुआवजा देने की मांग

प्रभावित किसान अपना दुखड़ा किसे सुनाए, यह बात उनके जेहन में कौंध रही है। किसानों का कहना है कि सावन माह में हुई भारी बारिश से उन्हें नुकसान हुआ है। खरीफ खेती-किसानी में प्रभावित किसानों ने पूरा खर्च कर चुका है। उनके खेतों में पौधा लहलहाने लगा था।

करीब पखवाड़ेभर के भीतर इन पौधों से धान की बालियां निकल आती। क्योंकि उनके खेतों में हरूना धान की फसल करीब दो माह पहले से लगी हुई है। प्रभावित किसानों की मांग है कि कृषि विभाग व शासन की टीम जल्द ही नुकसान का आंकलन करें, ताकि प्रभावितों को शासन से सहायता राशि व प्रधानमंत्री फसल बीमा का लाभ मिल सके। आंकलन में लेटलतीफी हुई, तो इसका सीधा नुकसान किसानों को उठाना पड़ेगा।

जल्द किया जाएगा आंकलन

भारी बारिश से प्रभावित किसानों की धान फसल का कृषि विभाग के अधिकारी, कर्मचारी व टीम जल्द ही नुकसान का आंकलन करेंगे। वास्तविक नुकसान आंकलन की रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। - एलपी अहिरवार, कृषि उपसंचालक धमतरी