धमतरी। बोनसाई... यानी पेड़ों को बौना बनाना। अच्छी खासी आमदनी का जरिया, लेकिन इसके लिए प्रशिक्षण की भी जरूरत पड़ेगी। किसी विशेषज्ञ अथवा जानकार से यह हुनर सीखा जा सकता है। जैसे-जैसे अनुभव बढ़ते जाएगा, आप इसमें एक्सपर्ट होते जाएंगे। इसकी कीमत कुछ भी हो सकती है। सामने वाले को पसंद आ जाए तो आप जितना सोचेंगे, उससे भी ज्यादा में बिक सकता है। जिनके पास जगह की कमी है। बड़ी बागवानी तैयार नहीं कर सकते। उनके लिए यह बड़े ही काम की चीज है। घर के बरामदे में पीपल, बरगद, अमरूद, आम जैसे पेड़ लगाने हों तो बोनसाई ही एकमात्र तरीका है।

शहर के पर्यावरण प्रेमी डॉ. प्रदीप शर्मा का पर्यावरण के प्रति प्रेम देखते ही बनता है। उन्होंने घर पर ही दर्जनों बोनसाई तैयार कर रखे हैं। गमले में उगे बोनसाई के ये वृक्ष 30 से 35 साल पुराने हैं। पर्यावरण के क्षेत्र में कई सम्मान पा चुके डॉ. शर्मा कहते हैं कि पर्यावरण में संतुलन बनाए रखने के लिए हर एक को कम से कम एक पौधा तो जरूर लगाना चाहिए।

वर्तमान में स्थानाभाव के कारण गमले में बोनसाई तैयार करना एक अच्छा विकल्प है। इससे आसपास का माहौल तो हरा-भरा होता ही है, घर की सुंदरता भी बढ़ती है। उन्होंने बताया कि उन्हें बचपन से पर्यावरण में गहरी रुचि थी।

एकाएक प्रदर्शनी में उनका रुझान बोनसाई की ओर हुआ। इसके बाद उन्होंने छोटे पौधे तैयार करने की विधि के बारे में अध्ययन किया। धीरे-धीरे उन्होंने पौधे तैयार करना सीख लिया। उनके घर में 50 से भी अधिक बोनसाई वृक्ष तैयार हैं। इसकी देखरेख वे स्वयं करते हैं।

उन्होंने बताया कि छोटे वृक्षों की देखभाल बड़े जतन से करनी पड़ती है। नियमित रूप से इसे पानी देना पड़ता है। खासकर गर्मी के मौसम में विशेष ध्यान रखना जरूरी है। उनके घर के गमलों में गुड़हल, जामुन, पीपल, बरगद, आम, अंगूर, इमली, करौंदा, नींबू आदि के पेड़ हैं। फूलों में सेवंती, कागज फूल, गुलाब, गेंदा, अडेनियम, रजनी गंधा, रातरानी, मोंगरा आदि हैं।