रायपुर। छत्तीसगढ़ का प्रयागराज कहे जाने वाले राजिम में प्रतिवर्ष होने वाले धार्मिक आयोजन को लेकर बुधवार को सदन में पूर्व और वर्तमान धर्मस्व मंत्री आमने- सामने हुए। मंत्री ताम्रध्वज साहू ने कहा कि राजिम में होने वाले आयोजन का केवल नाम बदला गया है, मेला बंद नहीं किया गया है। इस पर पूर्व धर्मस्व मंत्री और भाजपा विधायक बृजमोहन अग्रवाल ने पूछा कि आखिर आपको कुंभ शब्द से इतनी आपत्ति क्यों है?

विधानसभा में मामला प्रश्नकाल के दौरान उठा। अग्रवाल ने पूछा कि क्या सरकार ने राजिम कुंभ को बंद करने का निर्णय लिया है? मंत्री साहू ने कहा कि मेला बंद नहीं हुआ है। हमने उसका नाम माघी पुन्नी मेला किया है। साहू ने कहा कि राजिम में माघी पुन्नी मेला सैकड़ों साल से चल रहा था। पिछली सरकार ने अपने कार्यकाल में नाम बदला था। हमने जन भावना को देखते हमने राजिम कुंभ मेले को उसके मूल स्वरुप में लाया है।

इस पर अग्रवाल ने कहा कि नाम को लेकर कभी कोई कानून नहीं था। कुंभ को लेकर अपनी महत्ता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सैकड़ों स्थान पर पुन्नी मेले का आयोजन होता है, लेकिन राजिम खास है। उन्होंने कहा कि महाभारत, विष्णु पुराण, स्कंद पुराण और राजिम महात्म्य पुराण का उल्लेख करते हुए कहा कि इन ग्रंथों में राजिम की मान्यता प्रयागराज की तरह बताई गई है।

कुंभ शब्द से इतनी आपत्ति क्यों है? भाजपा सदस्य अजय चन्द्राकर ने कहा है कि नाम बदले के लिए जब विधेयक लगाया गया तब उसके उद्देश्यों के कथन में आपने लिखा था कि यह शास्त्र अनुकूल नहीं है। जब यह लिखा है मतलब यही है कि आपने नाम बदलने के लिए जो संशोधन पेश किया था तब इसकी जानकारी ली थी।

इस पर कांग्रेस के अमितेष शुक्ला ने कहा कि शंकराचार्य आपके कुंभ को नहीं मान रहे है, तो हम क्यों मानें? संस्कृति मंत्री ताम्रध्वज साहू ने कहा कि जब मंदिर शुरू हुआ। मेला शुरू हुआ तब क्या चुनाव होते थे। रायपुर गजेट 1909 में इसका उल्लेख है कि राजिम में माघी पुन्नी मेला होता रहा है।