रायपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

इंसान के अंदर कुछ करने का जज्बा हो तो पर्वत क्या, आसमान को भी फतह कर सकता है। मन में लक्ष्य बड़ा हो तो फिर बाधाओं को परास्त करना आसान हो जाता है। ऐसा ही कुछ कर गुजरने का जज्बा रखने वाली रायपुर की महिला अनुपमा त्रिपाठी ने दिव्यांग होने के बावजूद एक नया मुकाम हासिल किया। अनुपमा ने पूरे दिव्यांगों की ओर से समाज को संदेश दिया कि दिव्यांगों को किसी से कमतर न आंका जाए। सोमवार को अनुपमा ने महादेव घाट से मनीन ड्राइव तक पैदल चलकर 10 किलोमीटर का सफर तय किया। गौरतलब है कि अनुपमा का एक पैर नहीं है। उन्होंने 2011 में सड़क दुर्घटना में एक पैर खो दिया। उस हादसे से उबरने में काफी समय लगा। बाद में उन्होंने अपनी जिंदगी को नए सिरे से जीना प्रारंभ किया और समाज-सेवा शुरू की। अनुपमा बताती हैं कि घटना के बाद मुझे ऐसा लगा कि ईश्वर ने मुझे बचाया है तो जरूर कुछ मकसद होगा। तभी से मैं समाज सेवा में लग गई। मैं आज यात्रा तय कर समाज के लोगों को बताना चाहती हूं कि दिव्यांग भी किसी से कम नहीं हैं। हमें कमतर न समझा जाए। हम भी सभी के साथ कंधे से कंधे मिलाकर चल सकते हैं।

दो घंटे में पैदल चलीं 10 किलोमीटर, बनाया रिकॉर्ड

तन ही मेरा दिव्यांग है मन में ऊंची उड़ान है। अनुपमा ने मन में यह ठाने हुए एक पैर में आर्टिफिशियल पैर लगाकर महादेव घाट से सुबह 9.40 मिनट पर पैदल चलना शुरू किया और 11.40 पर मरीन ड्राइव पंहुचीं। इसमें लगभग 10 किलोमीटर की यात्रा मात्र दो घंटे में पूर्ण कर 'ब्रावो इंटरनेशनल बूक ऑफ रिकॉर्ड (विश्व रिकॉर्ड)' बनाया। विश्व रिकॉर्ड को दर्ज करने 'ब्रावो इंटरनेशनल बूक ऑफ रिकॉर्ड' के परिवेक्षक प्रोफेसर दिनेश गुप्ता ने मौजूद रहकर रिकॉर्ड की पुष्टि की। ब्रावो विश्व रिकॉर्ड का प्रशस्तिपत्र अनुपमा त्रिपाठी को प्रदान किया गया। पद यात्रा का शुभारंभ पश्चिम विधानसभा क्षेत्र के विधायक विकास उपाध्याय ने किया। साथ ही कान्यकुब्ज सभा के अध्यक्ष अरुण शुक्ल, आशीष मिश्र ने राष्ट्रीय ध्वज हाथों में सौंपा। समापन में मुख्य अथिति रायपुर विकास बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष संजय श्रीवास्तव, प्रफुल्ल विश्वकर्मा सभापति नगर निगम, मधुसूदन जोशी, डॉ. उत्कर्ष त्रिवेदी आदि उपस्थित रहे।