कोरबा। नईदुनिया प्रतिनिधि

वन विभाग के लाख मना करने के बाद भी ग्रामीण वनोपज संग्रहण करने जंगल निकल जा रहे। एक बार फिर दंतैल हाथी ने महुआ डोरी एकत्रित कर रही दो महिलाओं को दौड़ाया, जिसमें एक महिला को वन विभाग की ट्रैकिंग टीम ने अपनी जीप में बैठा कर उसकी जान बचा ली। वहीं एक 60 साल की वृद्धा को हाथी ने कुचल दिया। घायल अवस्था में उसे अस्पताल ले जाया गया, इस बीच उसकी मौत हो गई। पांच दिन के अंदर हाथी के पैरों तले कुचले जाने से मौत की यह दूसरी घटना है।

करतला वन परिक्षेत्र के ट्रैकिंग दल प्रभारी एमआर पोर्ते वनकर्मियों के साथ जीप में नोनबिर्रा व तुर्रीकटरा के ग्रामीणों को हाथियों से आगाह करने के बाद ग्राम पीड़िया की ओर जा रहे थे। इस बीच ट्रैकिंग टीम ने मूतरीजाम के पास देखा कि झुंड से अलग घूम रहा एक दंतैल हाथी दो महिलाओं को दौड़ा रहा। आनन-फानन में जीप की रफ्तार तेज की गई और हाथी से महिलाओं को बचाने की कोशिश वनकर्मियों ने शुरू कर दी। बताया जा रहा है कि वनकर्मी हाथी को खदेड़ने का प्रयास किया, पर इसका असर हाथी पर नहीं हुआ। एक महिला को तो किसी तरह चलती जीप में वनकर्मियों ने खींचकर अंदर डाल लिया और वह सुरक्षित बच गई, जबकि पीड़िया के दादरपारा में रहने वाली रमशिला राठिया पति आशाराम (60) उम्रदराज होने की वजह से दौड़ नहीं पाई और एक पेड़ के ठूंठ से टकराकर गिर पड़ी। हाथी उसे कुचलते हुए आगे बढ़ गया। हाथी को खदेड़ने के बाद घटनास्थल पहुंचकर विभागीय जीप में ही रमशिला को तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र करतला ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।

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वनोपज की लालच में जा रही जान

11 जून से 25 हाथियों का झुंड बोतली, टेंगनमार व पीड़िया क्षेत्र में भ्रमण कर रहा। वन विभाग की नजर इस झुंड पर थी। वन अधिकारियों का कहना है कि हाथियों के झुंड में एक नर दंतैल हाथी को उत्पाती होने की वजह से अलग कर दिया गया है। झुंड के पीछे-पीछे यह दंतैल चल रहा था। हिंसक प्रवृत्ति के होने की वजह से वनोपज के लिए ग्रामीणों को जंगल में नहीं जाने की सलाह लगातार जीप में भ्रमण कर लाउडस्पीकर से दी जा रही थी। साफ तौर पर ग्रामीणों से कहा गया था कि अभी घर से बाहर निकलना खतरे से बाहर नहीं है। इसके बाद भी ग्रामीण महुआ डोरी व आम एकत्रित करने जंगल जा रहे।

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हाथ पकड़कर पति ने रोका फिर भी चली गई

रमशिला बाई को मानों मौत ही जंगल तक खींच लाई। पति आशाराम ने डोरी एकत्रित करने जंगल जाने से रमशिला को मना किया, लेकिन वह नहीं मानी। आशाराम का कहना है कि वह दरवाजे पर रमशिला का हाथ पकड़ लिया था, ताकि वह घर से बाहर न निकले। इसके बाद भी हाथ छुड़ाकर वह चली गई थी। इस बात का अफसोस करते हुए आशाराम ने वन अधिकारियों को बताया कि काश उसकी पत्नी उसकी बात मान लेती, तो आज यह दिन देखना नहीं पड़ता।

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पांच दिन पहले चांपा में गई थी वृद्ध की जान

नौ जून को करतला वन परिक्षेत्र के चांपा निवासी घुसीराम राठिया (60) को दंतैल हाथी ने उस वक्त कुचल दिया था, जब वह पेड़ से गिरे आम एकत्रित कर रहा था। कटहल खा रहे हाथी ने उसे दौड़ाया और वह भाग नहीं सका। पांच दिन के अंदर पीड़िया में दूसरी घटना हो गई। हाथी से बचने वन विभाग घर से नहीं निकलने की सलाह दे रहे हैं, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि घर से निकले बिना काम कैसे चलेगा। यहीं वजह है कि एक के बाद एक मौत की घटना सामने आ रही है। अब तक 54 लोगों को हाथी मौत के घाट उतार चुके है। वहीं 25 लोगों को घायल कर चुके हैं। फसल क्षति के 22 हजार 418 प्रकरण दर्ज किए गए हैं।

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चार दिन पहले मिली थी हाथी की लाश

केवल ग्रामीणों को ही नहीं बल्कि हाथियों की मौत कोरबा व कटघोरा वनमंडल क्षेत्र में हो रही है। अभी 11 जून को केंदई वन परिक्षेत्र के कापानवापारा में एक नौ से 10 साल के व्यस्क हाथी की मौत संदिग्ध परिस्थिति में हो गई। वन विभाग भले ही दावा कर रही है कि हाथी बीमार था, इसकी वजह से ही मौत हो हुई होगी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार विभाग को है। वहीं कुछ लोगों को कहना है कि हाथी को गांव के लोगों ने खदेड़ा है, इस दौरान उसे चोटें आई थी। अब तक जिले में करीब आठ हाथियों की मौत हो चुकी है।

वर्सन

पिछले चार दिन से करतला वन परिक्षेत्र में 25 हाथी भ्रमण कर रहे, जिसमें एक दंतैल हाथी झुंड से अलग घूम रहा। इस लिहाज से क्षेत्र में सुबह-शाम दो बार दो वाहन में वन विभाग की टीम व कोटवार क्षेत्र में मुनादी करने निकलते हैं। इस दौरान ग्रामीणों को हाथी का लोकेशन बताया जाता है, साथ ही गांव बाहर नहीं निकलने की हिदायत दी जाती है। पीड़िया में भी लगातार ग्रामीणों को समझाइश दी जा रही थी। यह घटना उस वक्त हुई, जब ट्रैकिंग टीम पीड़िया में जमे हाथियों की निगरानी करने जा रही थी। संयोग से मौके पर ही टीम पहुंच गई और एक महिला की जान बचा ली गई।

- आमीर खान, रेंजर, करतला वन परिक्षेत्र