0 शुक्रवार की रात इस सीजन की सर्वाधिक सर्द रात रही

0 अंबिकापुर का तापमान लुढ़ककर 8.2 डिग्री सेल्सियस पर पहुंचा

0 उत्तरी सर्द हवाओं से ठिठुरन भरी ठंड बढ़ी

फोटो-3, 4 मैनपाट में गिरा पाला

अंबिकापुर । नईदुनिया प्रतिनिधि

उत्तरी सर्द हवाओं से सरगुजा में कड़ाके की ठंड शुरू हो गई है। मैदानी व पाठ क्षेत्रों में सर्द हवाओं से ठिठुरन बढ़ गई है। शुक्रवार की रात इस सीजन की सर्वाधिक सर्द रही, जब अंबिकापुर का तापमान 8.2 डिग्री सेल्सियस पर पहुंचा। छत्तीसगढ़ के शिमला के नाम से मशहूर मैनपाट में ओस की बूंदें जमने लगी हैं। शनिवार सुबह मैनपाट के कई क्षेत्रों में घास व पुआल के ढेर सफेद दिखे। ठंड का असर सामान्य जनजीवन पर भी पड़ने लगा है। दिन में भी लोग अब गर्म कपड़े पहने नजर आने लगे हैं।

बादल से दिसंबर के शुरुआती दिनों में सरगुजा में न्यूनतम तापमान लगभग 12 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना था। बादल छंटते ही ठंड का पलटवार हुआ। उत्तर दिशा की ओर से आ रही शुष्क व सर्द हवाओं ने ठंड बढ़ा दी। रोज दिन व रात के तापमान में गिरावट दर्ज किए जाने के साथ ही मैदानी व पाठ क्षेत्रों में चल रही ठंडी हवाओं के तेवर तीखे होते जा रहे हैं। पाठ क्षेत्रों की हालत ठंड से और खराब होने लगे हैं। मैनपाट व सामरी क्षेत्र में न्यूनतम तापमान 3 डिग्री से नीचे चले जाने से यहां ओस की बूंदें जमनी शुरू हो गई। पाला से अलसुबह खेत, खलिहान व घास अब सफेद नजर आने लगे हैं। हालांकि मजबूत क्रिस्टल नहीं बन रहे हैं, लेकिन सूर्योदय के कुछ देर बाद तक ओस की बूंदें सफेद नजर आ रही हैं। मैनपाट के बरिमा स्थित आलू अनुसंधान केंद्र में तापमापी यंत्र लगाया गया है। शनिवार को यहां का न्यूनतम तापमान 2.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मैनपाट में पूरे दिन ठंडी हवाओं के चलने से सामान्य जनजीवन पर भी इसका असर दिखा। लोग ठंड से बचने सारे उपाय कर घरों से निकले। यही स्थिति अंबिकापुर शहर की भी है। शनिवार सुबह अंबिकापुर में पारा लुढ़ककर 8.2 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया। इस सीजन का यह सबसे कम तापमान रहा। प्रदेश में सर्वाधिक ठंड अंबिकापुर में ही रही। ठंड से शाम ढलते ही शहर की सड़कों पर वीरानी छाने लगी है। मौसम वैज्ञानिकों ने कहा कि अगले 48 घंटे मौसम का मिजाज ऐसा ही बना रहेगा। 10 दिसंबर को आकाश में बादल छाने से दिन व रात के तापमान में मामूली बढ़ोतरी होगी। यह स्थिति दो दिनों तक रहेगी। 12 दिसंबर को मौसम साफ होते ही ठंड का एक बार फिर से पलटवार होगा।

तीन डिग्री से कम तापमान इसलिए पाला

मौसम विज्ञानी एएम भट्ठ ने बताया कि जल कणों के पाला या तुषार रूप में आने के लिए आवश्यक है कि आसमान साफ हो, बादल न रहे। रात का तापमान लगातार 3 डिग्री सेल्सियस या उससे कम बना रहे और शुष्क हवाएं खासकर ऊषा काल में चले। उन्होंने बताया कि शीत ऋतु में सूर्योदय के तुरंत बाद तापमान तेजी से गिरता है। इसी दौरान किसी प्रकार के मौसमी विक्षोभ रहित दिनों में दैनिक तापमान अपनी न्यूनतम मान तक पहुंचता है अर्थात्‌ सूर्योदय के तुरंत बाद वातावरण सबसे ठंडा हो जाता है, जिससे अनुकूल परिस्थिति मिलते ही पौधों के पत्तों पर ओस की बूंदे जम जाती है। अभी अंबिकापुर का तापमान पाला के अनुकूल नहीं हैं, परंतु पठारी क्षेत्रों से मिली जानकारी के अनुसार वहां का न्यूनतम तापमान लगातार 3 डिग्री सेल्सियस के आसपास पिछले कुछ दिनों से बना है। लिहाजा वहां पाला पड़ने की संभावना अधिक है।

अभी तक नहीं हुई अलाव की व्यवस्था

कड़ाके की ठंड में हर वर्ष निगम प्रशासन द्वारा सार्वजनिक स्थानों पर अलाव जलाया जाता है। इस बार अलाव की व्यवस्था अभी तक नहीं की गई है। अंबिकापुर शहर में अलाव की सर्वाधिक जरूरत प्रतीक्षा बस स्टैंड में रहती है, जहां सारी रात यात्री बसों का आना-जाना रहता है। इसके अलावा शहर के कुछ चौक-चौराहों में भी रिक्शा, आटो वाले देर रात तक यात्रियों को लाने ले जाने खड़े रहते हैं। जिस तेजी से तापमान नीचे गिर रहा है, जरूरी है कि घर से बाहर निकले लोग जिन्हें समय बिताना है, उन्हें अलाव की सुविधा मिले।

तापमान एक नजर में

दिन दिनांक अधिकतम न्यूनतम

शनिवार 8 दिसंबर 22.6 8.2

शुक्रवार 7 दिसंबर 22.6 9.5

गुरुवार 6 दिसंबर 22.0 9.8

बुधवार 5 दिसंबर 22.0 9.8

मंगलवार 4 दिसंबर 23.1 10.9