रायपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

पहले गरीबी और मुफलिसी के दौर से पूरा परिवार गुजर रहा था। किसी तरह गृहस्थी चलती थी। आर्थिक परेशानियों में घिरी सरोना की दया सोनकर ने कुछ कर गुजरने की ठानी। घरेलू उत्पाद घर में तैयार कर दुकानों पर बेचने लगीं। इसके बाद वे सात बहनिया स्वसहायता समूह का गठन करने में जुट गईं। आखिरकार इनकी मेहनत रंग लाई। इनकी मुलाकात महिला बाल एवं विकास विभाग की सुपरवाइजर लक्ष्मी धुंरधर से हुई। उन्होंने दया को रेडी-टू-ईट की सप्लाई के लिए प्रेरित किया। उनकी समझाइश पर स्वसहायता समूह को विभाग में रजिस्टर्ड करावाया। इसके बाद इस समूह से धीरे-धीरे सरोना क्षेत्र की महिलाएं भी जुड़ने लगीं। अब ये अपनी मेहनत से महीने में 50 से 60 क्विंटल रेडी-टू-ईट बना रहीं हैं। इनके नक्शे कदम पर ग्रामीण अंचल में भी 20 से अधिक स्वसहायता समूह रेडी-टू-ईट बनाने में जुट गए हैं। आज जिले के 70 समूह महिला एवं बाल विकास को आंगनबाड़ी के लिए एक करोड़ के लगभग पोषाहार की आपूर्ति कर रहे हैं। इससे ढाई हजार से अधिक महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत हो गई हैं।

-- 50 हजार से एक लाख रुपये तक कमा रहा हर समूह

दया से जुड़ीं कुछ और मर्दानी हैं, जो रेडी-टू-ईट के कारोबार के अलावा गृहस्थी भी संभाल रहीं हैं। दया सोनकर बताती हैं- पहले घर की आमदनी कम थी। बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ता था। अब सभी के सहयोग से करीब हर माह 50 क्विंटल रे-टू-ईट बना रही हूं। महीने में समूह को 50 हजार से अधिक आय हो जाती है। डिमांड के हिसाब से कम-ज्यादा निर्माण होता रहता है।

-ये मर्दानी भी संभाल रहीं कारोबार और गृहस्थी

सरोना समूह में दया के अलावा नर्बदा ध्रुव, शकुन बाई, धनशीर साहू, लक्ष्मी यादव और जय श्री ठाकुर हैं। धरसींवा में माधुरी साहू ने भी महिलाओं को जागरूक कर अपना समूह बना लिया है। सबकी मेहनत से प्रत्येक महिला अच्छी आय कर रही है।

--बाजार में भी इनके प्रोजेक्ट की धूम

दया ही नहीं, स्वसहायता समूह द्वारा बनाए गए रेडी-टू-ईट की धूम रायपुर ही नहीं, बल्कि आसपास के जिलों में भी है। कारण यह है कि पूरी तरह से देशी तर्ज पर तैयार करने की विधि लोगों को आकर्षित करती है। सस्ती दर से भी लोकप्रियता मिली है। इसमें भरपूर प्रोटीन और कैलोरी रहती है।

--ग्रामीण अंचलों में भी समूह चल पड़े नक्शे कदम पर

-ग्रामीण अंचलों में भी अधिकांश समूह नक्शे कदम पर चल पड़े हैं। महिलाएं अपने ही घर-आंगन में देशी तकनीक से रेडी-टू-ईट बना रही हैं। इनमें अधिकांश महिलाएं ऐसी हैं, जो कभी छोटे काम जैसे मोमबत्ती, अगरबत्ती बनाती थीं।

--महिलाओं को विधिवत दी गई रेडी-टू-ईट बनाने की ट्रेनिंग

महिलाओं के हुनर में और निखार लाने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग ने विधिवत ट्रेनिंग दी। रेडी-टू-ईट बनाने की विधि बताई गई। इसके बाद विभाग ने इनके लिए गेहूं और शक्कर सस्ती दर पर पीडीएस दुकानों से दिलाने की व्यवस्था कराई।

--इन ब्लॉक में इतने समूह

मंदिर हसौद में सात, अभनपुर में 12, तिल्दा में दस, आरंग में नौ, धरसींवा में 14, रायपुर में 12 समूह हैं। जहां आज हजारों महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त हैं।

--एक समूह 24 आंगनबाड़ी में कर रहा सप्लाई

एक-एक समूह को सेक्टर के हिसाब से 24 आंगनबाड़ी में रेडी-टू-ईट की सप्लाई कर रहा है।

वर्जन

--स्वसहायता समूहों से रेडी-टू-ईट बनवाने से महिलाओं की आर्थिक स्थिति सुधरी है। सालाना करीब 50 लाख से एक करोड़ तक इनकी आय हो जाती है। -अशोक पांडेय, डीपीओ, महिला एवं बाल विकास विभाग