रायपुर। विधानसभा में पंचायत विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा नहीं होने पर सियासी गलियारे में सरकार की जमकर आलोचना हो रही है। सत्ता संभालने के बाद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अफसरशाही को लेकर बयान दिया था कि सवाल घोड़े का नहीं, घुड़सवार का है। हमें घुड़सवारी करनी आती है।

विधानसभा में जब मंत्री टीएस सिंहदेव ने माफी मांगी तो भाजपा ने निशाना साधा। भाजपा प्रवक्ता और मुख्य सचेतक शिवरतन शर्मा ने कहा कि विपक्ष में रहने के दौरान भूपेश बघेल घुड़सवार के कथित कमजोर होने की बात करते थे, आज घुड़सवार को भरे मैदान में घोड़े ने पटक दिया है।

दरअसल, राजनीतिक गलियारे में यह चर्चा भी जोरों पर थी कि अफसर अब भी भाजपा के पक्ष में हैं। यह सवाल भी उठ रहा है कि सत्ता संभालने के बाद से भूपेश बघेल अफसरशाही को कंट्रोल नहीं पा रही है। इन आरोपों को विपक्ष भी हवा दे रही है। शिवरतन शर्मा ने कहा कि प्रदेश के इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ था।

सरकार प्रतिशोध की आग में इतना छटपटा रही है कि उसे सामान्य विधायी कामकाज के लिये भी समय नहीं बचा है। बुधवार सुबह तक विभागों के प्रतिवेदन विधानसभा में प्राप्त नहीं हुए थे, जो आश्चर्यजनक है। विभाग की तैयारी नहीं होने का हवाला देकर चर्चा को स्थगित करना यह दिखाता है कि अधिकारी बेलगाम हैं।

राजनीतिक प्रेक्षकों की मानें तो कभी विपक्ष में रहने के दौरान अफसरों के बेलगाम होने का मुद्दा कांग्रेस विधायक उठाते थे। अब जब सरकार में हैं, तो यही अफसरशाही उनके गले की हड्डी बनते नजर आ रहे हैं। इस मामले को लेकर जब मंत्री टीएस सिंहदेव से मीडिया ने सवाल किया तो उन्होंने सिर्फ इतना ही कहा कि घोड़ा भी यहीं है और घुड़सवार भी यहीं हैं।