0 प्राचीन कला को एक बार फिर पहचान देने हो रही कोशिश

0 शहर के कई स्कूलों में हुआ कठपुतली शो का आयोजन

अंबिकापुर । नईदुनिया प्रतिनिधि

प्राचीन कठपुतली कला की पहचान को दोबारा स्थापित करने भारतीय जननाट्य संघ इप्टा ने शहर के स्कूलों में इस कला का प्रदर्शन कराया। शहर के कई स्कूलों में कठपुतली कला के प्रदर्शन को देख नई पीढ़ी के बच्चे आश्चर्यचकित रह गए। बच्चों के साथ स्कूल के शिक्षकों ने भी इस पुरानी कला को देखा तो मंत्रमुग्ध हो गए। स्कूलों में कठपुतली कला के माध्यम से बच्चों को अंधविश्वास से दूर रहने और जागरुकता का संदेश दिया गया।

भिलाई के मशहूर रंगकर्मी विभाष उपाध्याय अपने साथियों के साथ इप्टा के पहल पर शहर पहुंचे हैं। स्कूलों में पपेट शो के माध्यम से बच्चों को जागरुक कर रहे हैं। नगर के बौरीपारा स्थित सीजी ग्लोबल पब्लिक स्कूल में प्रस्तुति दी गई। गीत-संगीत के माध्यम से कठपुतली कला के जरिए विभाष उपाध्याय ने धार्मिक कहानियों से जुड़े प्रसंगों की प्रस्तुति दिखाकर बच्चों व उपस्थितजनों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कठपुतली कला के जरिए जागरुकता लाने के इस प्रयास को खूब सराहना मिली। श्री उपाध्याय का कहना है कि कठपुतली शो केवल मनोरंजन नहीं है। इस कला के माध्यम से सामाजिक बुराईयों को दूर करने का संदेश मिलता है। यह कला कभी समाप्त नहीं होगी। रंगगर्मी विभाष करीब 25 वर्ष पहले इप्टा अंबिकापुर में विश्व प्रसिद्घ उपन्यास स्पार्टाकस का मंचन किया था जो आज भी शहरवासियों के जेहन में है। तीन वर्ष पूर्व भी उन्होंने शहर के आधा दर्जन स्कूलों में इप्टा अंबिकापुर इकाई के माध्यम से कठपुतली शो किया था। वे कई देशों में कठपुतली शो कर चुके हैं। भारत की इस कठपुतली कला को विश्व के कई देशों में काफी सम्मान मिला है। इस आयोजन में इप्टा के अध्यक्ष प्रीतपाल सिंह अरोरा, कृष्णानंद तिवारी, जयेश वर्मा, संजय मनवानी, संजय श्रीवास्तव, बृजभूषण मिश्रा, तेजिन्दर सिंह धंजल सहित काफी संख्या में इप्टा से जुड़े लोग सक्रिय रहे।