Naidunia
    Sunday, December 17, 2017
    PreviousNext

    23 साल में यहां एक भी लॉ कॉलेज नहीं पा सका ऐसी ग्रेडिंग

    Published: Fri, 08 Dec 2017 12:33 PM (IST) | Updated: Fri, 08 Dec 2017 12:37 PM (IST)
    By: Editorial Team
    law college 08 12 2017

    धीरेंद्र सिन्हा, बिलासपुर । वकालत की पढ़ाई को लेकर युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ हो रहा है। नैक ग्रेडिंग की शुस्र्आत से लेकर अब तक बीते 23 साल में एक भी लॉ कॉलेज ने नैक ग्रेडिंग हासिल नहीं की है। गुणवत्ता युक्त शिक्षा को लेकर इन कॉलेजों में संशय की स्थिति बनी हुई है। इस बीच बार कौंसिल ऑफ इंडिया भी इस पर कोई ध्यान नहीं दे रहा है।

    बीयू से संबद्ध संभाग में पांच लॉ कॉलेज हैं। सबसे पुराना एसबीकेपी कॉलेज रायगढ़ है जिसकी स्थापना 1960 में हुई थी। इसके अलावा कौशलेंद्र राव विधि महाविद्यालय लिंक रोड, डीपी विप्र लॉ कॉलेज सरकंडा, ज्योति भूषण लॉ कॉलेज कोरबा और टीसीएल जांजगीर शामिल हैं।

    राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (नैक) की स्थापना वर्ष 1994 में हुई थी। तब से 23 साल बीत चुके हैं, लेकिन इस सभी कॉलेजों ने अब तक ग्रेडिंग हासिल नहीं की है। नैक को निरीक्षण के लिए तीन से चार कॉलेजों ने तो प्रस्ताव तक नहीं भेजा है। जबकि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के खास नियम में पंजीकृत होना अनिवार्य है। बीयू प्रशासन ने एक ओर आदेश जारी कर खानापूर्ति की है।

    वहीं बार कौसिंल ऑफ इंडिया ने भी अभी तक कोई संज्ञान नहीं लिया है। प्रतिवर्ष एक हजार से अधिक युवा इन संस्थाओं से वकालत की पढ़ाई पूरी कर निकलते हैं। गुणवत्ता युक्त शिक्षा के नाम पर यहां खिलवाड़ हो रहा है। अनुदान पर भी असर: यूजीसी के नियम 12 (बी) और 2 एफ के तहत सभी कॉलेज और विश्वविद्यालयों को पंजीकृत किया जाता है।

    यह पंजीयन संस्थाओं में शैक्षिक विभाग, शिक्षकों और स्टाफ की संख्या, भवन, संसाधन, सह शैक्षिक गतिविधियों और अन्य आधार पर होता है। इसमें पंजीकृत कॉलेजों व विश्वविद्यालयों को विकास कार्यों, शैक्षिक कॉन्फ्रेंस, कार्यशाला, भवन निर्माण आदि के लिए अनुदान मिलता है। नैक ग्रेडिंग के बाद इसमें आसानी होती है।

    फैकल्टी में दम नहीं

    टीचिंग फेकल्टी में भी कोई दम नहीं है। पांचों कॉलेजों को मिलाकर भी 50 टीचिंग फेकल्टी नहीं है। यूजीसी की धारा 28 के तहत जो भर्ती की जाती है उसमें भी कई बीच में छोड़कर चले जाते हैं।

    टीसीएल जांजगीर में लॉ एक विभाग के रूप में संचालित है, लेकिन कॉलेज का नैक निरीक्षण नहीं कराया गया है। प्रवेश के दौरान बीयू ने स्थायी प्राचार्य, पर्याप्त व्याख्याता, स्टाफ की नियुक्ति और संसाधनों की कमी दूर करने नोटिस भी दिया था।

    नैक निरीक्षण के लिए तैयारी चल रही है। बहुत पैसा और तैयारी करनी पड़ती है। सिंगल फेकल्टी है। हमारी कोशिश जारी - डॉ. अन्नू भाई सोनी प्राचार्य, डीपी विप्र लॉ कॉलेज

    नैक ग्रेडिंग हासिल करना सभी की इच्छा होती है। हमने एक बार एलओआई भेजा था। रिजेक्ट हो गया। -एम.राउत प्राचार्य, एसकेबी लॉ कॉलेज, रायगढ़

    नैक निरीक्षण सभी संस्थाओं के लिए जरूरी है। इससे गुणवत्ता युक्त शिक्षा का पता चलता है। काफी देर तो हुई है, लेकिन अभी प्रयास जारी है। - डॉ.सतीश तिवारी, अधिष्ठाता विधि संकाय, बिलासपुर विश्वविद्यालय

    प्रतिक्रिया दें
    English Hindi Characters remaining


    या निम्न जानकारी पूर्ण करें
    नाम*
    ईमेल*
    Word Verification:*
    Please answer this simple math question.
    +=

      जरूर पढ़ें