राजनांदगांव। साल्हेवारा से लगे वनांचल के ग्राम नचनिया निवासी पुरुषोत्तम बोरीकर (साहू) अपनी सवा तीन साल की बेटी दुर्गेश्वरी के दिल में जन्मजात छेद का इलाज कराने छह माह से भटक रहा है। गांव से जिला मुख्यालय तक 110 किलोमीटर आने के लिए लोगों की मदद लेने वाले पिता ने राजधानी रायपुर तक कई बार दौड़ लगाई।

बीमार बच्ची को लेकर बेंगलुरू और अन्य बड़े शहरों के नामी अस्पतालों का चक्कर लगाया, लेकिन महंगा इलाज नहीं करा पाने की मजबूरी ने अब उसे भगवान भरोसे छोड़ दिया है। इस दौड़-भाग में पुरुषोत्तम ने अपनी हैसियत से कहीं ज्यादा (करीब तीन लाख रुपए) खर्च कल डाला जिसमें से डेढ़ लाख रुपए कर्ज के हैं।

अब इसी कर्ज को चुकाने के लिए बेबस पिता फिर से शासन-प्रशासन का चक्कर लगा रहा है। इस बार उन्होंने फिर से आर्थिक मदद की गुहार लगाई है ताकि कर्ज मुक्त हो सके। पुरुषोत्तम ने सोमवार को कलेक्टर जनदर्शन में मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह के नाम आर्थिक सहायता के लिए आवेदन लगाया है।

इसमें उन्होंने अपनी परेशानियों के साथ ही बेटी के इलाज में हुए खर्चों का उल्लेख किया है। बताया गया है कि इलाज के लिए कोई शासकीय मदद नहीं मिली। इस कारण उन्होंने अपने स्तर पर जितना संभव हो सका, कर लिया। इसके बाद भी बेटी जिंदगी का जंग लड़ रही है। दिल का छेद भर पाना मुश्किल है। ऐसे में इलाज को लेकर हुए कर्ज से मुक्ति के लिए आर्थिक सहायता दी जाए।

इलाज में अब तक तीन लाख रुपए खर्च हो चुके हैं। इसमें से डेढ़ लाख रुपए उन्होंने ब्याज पर उधार लिया है। घास जमीन पर घर बनाकर रह रहे परषोत्तम का कहना है कि सरकारी मदद की आस में कर्ज लिया था। इसे चुकाने की उनकी हैसियत नहीं है।

जहां बोले, वहा-वहां गया

करीब आठ माह से बेटी के इलाज के लिए भटक रहे पुरुषोत्तम उन तमाम लोगों को मिल चुका है, जिसके बारे में उन्हें बताया गया। स्वास्थ्य अधिकारी, कलेक्टर, महापौर, सांसद और यहां तक कि मुख्यमंत्री से भी इलाज के लिए मदद की गुहार लगा चुका है। बेबस पिता ने बेटी की जान बचाने जिला और राज्य ही नहीं बल्कि पड़ोसी राज्यों के नामी अस्पतालों का भी चक्कर लगाया।

देरी से लाइलाज हुई बीमारी

दुर्गेश्वरी के सीने में छेद को छह से आठ माह की उम्र में ही आसानी से भरा जा सकता था। सालभर पहले तक इलाज का खर्च 15 लाख बताया गया था, लेकिन किसी भी तरह की मदद न मिलने के कारण मासूम जीवन का जंग लड़ रही है।

मासूम के दिल में हैं तीन छेद, इलाज पर खर्च होंगे लाखों रुपए

दुर्गेश्वरी के दिल में बचपन से ही तीन छेद है, लेकिन इसका पता उसके पिता परषोत्तम को तब चला जब छेद बढ़ने के साथ तकलीफ भी बढ़ने लगी। ब्लाक के बाद जिला और फिर राज्य के नामी अस्पतालों का चक्कर शुरू हुआ।

रायपुर के तमाम स्पेशलिस्ट हास्पिटलों रामकृष्ण केयर हास्पिटल, आंबेडकर अस्पताल, सत्य सांई हास्पिटल, नारायणा हास्पिटल का चक्कर लगा चुका है पिता। इन अस्पतालों में उन्हें दो टूक जवाब मिला कि शुरुआत में ही आपरेशन हो जाना था। अब तो बहुत देर हो चुकी।

दिल के छेद का आकार काफी बढ़ चुका है। इसके बाद बैंगलुरू और हैदराबाद के नामी अस्पतालों तक दौड़ लगाई, लेकिन वहां इलाज कराने लायक रुपए हाथ में है ही नहीं। इसलिए निराश होकर घर लौट आया।