श्रीशंकर शुक्ला, रायपुर। छत्तीसगढ़ के अटल नगर (नया रायपुर) में बने एशिया के सबसे बड़े मानव निर्मित जंगल सफारी में वन्यप्राणियों को बिना परीक्षण के ही भोजन खिलाया जा रहा है। सेंट्रल जू अथॉरिटी ने जांच समिति जरूर गठित की है, लेकिन वह न तो वन्यप्राणियों के भोजन का परीक्षण कराती है, न ही सेहत की जांच।

लिहाजा, वन्यप्राणी असुरक्षा के बीच जीने को मजबूर हैं। एक आरटीआइ पर दिए गए जवाब में यह बात सामने आई है। तीन साल पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसका उद्घाटन किया था।

आरटीआइ में पूछा गया था कि जंगल सफारी के वन्यप्राणियों को दिए जाने वाले भोजन का परीक्षण होता है अथवा नहीं। जवाब आया कि वन्यप्राणियों को दिए जाने वाले मांस संबंधी जांच की सुविधा औषधी एवं खाद्य प्रशासन रायपुर में उपलब्ध नहीं होने के कारण बिना परीक्षण के ही वन्यजीवों को भोजन दिया जा रहा है।

इसमें यह भी लिखा गया है कि रायपुर के किसी अन्य संस्थान में भी यह सुविधा उपलब्ध नहीं है। जंगल सफारी के डीएफओ एम. मर्सिबेला ने बताया कि अंजोरा स्थित पशु चिकित्सालय में बात की गई है। अब वहां पर खाद्य पदार्थों को जांच के लिए भेजा जाएगा। जंगल सफारी के वन्यप्राणियों के भोजन पर हर महीने 10 लाख रुपये खर्च होता है।

समिति नहीं करती जांच

सेंट्रल जू अथॉरिटी ने जंगल सफारी में वन्यप्राणियों से जुड़े जांच के लिए समिति का गठन किया है। समिति में मुख्य वन संरक्षक, नंदनवन के डॉक्टर, जंगल सफारी के डॉक्टर और कामधेनु विश्वविद्यालय के प्रतिनिधि को शामिल किया गया है। पिछले तीन साल में समिति ने एक भी बार जंगल सफारी में वन्यप्राणियों के भोजन व उनकी सेहत की जांच नहीं की है।

800 एकड़ में फैला है जंगल सफारी

रायपुर शहर से करीब 25 किलोमीटर दूर जंगल सफारी तैयार किया गया है। करीब 800 एकड़ में फैले इस मानव निर्मित जू में वन्यप्राणियों को खुले में विचरण करते आसानी से देखा जा सकता है। प्रशासन नंदनवन को अब चिड़ियाघर के रूप में विकसित कर रहा है।