जगदलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुछ माह पूर्व आमसभा में दिए गए भाषण के दौरान कहा था कि देश का विकास तभी होगा जब एक हवाई चप्पल पहने वाला व्यक्ति हवाई यात्रा कर सके। गुरुवार को प्रधानमंत्री का यह भाषण चरितार्थ हुआ। बहुप्रतीक्षित विमान सेवा के तहत गुरुवार को जगदलपुर से 18 सीटर एयरकाफ्ट में सवार 18 यात्रियों को मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए भिलाई के जयंती स्टेडियम की सभा के दौरान हरी झंडी दिखाई। इस विमान में पहले सफर के लिए प्रशासन की ओर से एनआइटी के लिए चयनित माड़ के एक छात्र, दृष्टिबाधित छात्रा, उसके भाई, तेंदूपत्ता संग्राहक महिला आदि का चयन किया गया था।

14 जून की तारीख बस्तर के लिए ऐतिहासिक बन गई। केंद्र सरकार के उड़ान (उड़े देश का आम आदमी) योजना की परिकल्पना बस्तर में साकार हो गई। जनसमुदाय से भरे पंडाल के बीच नरेंद्र मोदी जिंदाबाद के नारों के साथ भाजपा के मंत्री केदार कश्यप, विधायक संतोष बाफना समेत आमजन ने एलईडी में भिलाई से लाइव पीएम का अभिभाषण न केवल सुना, वरन जिंदाबाद के नारे भी लगाए। बस्तर का आम आदमी जिसने कभी रेल यात्रा नहीं की थी, उसे पहली फ्लाइट में हवाई यात्रा का अवसर दिया गया। गौरतलब है कि सरकार ने कमर्शियल फ्लाइट के रेट में रियायत करते हुए 1650 रुपये में जगदलपुर से रायपुर तक का किराया निर्धारित किया है। वायुसेवा के लिए अनुबंधित कंपनी एयर ओडिशा को होने वाले घाटे की भरपाई राज्य सरकार करेगी।

खुशी और रोमांच के साथ यात्रियों ने भरी पहली उड़ान

नागरिक विमानन सेवा के प्रारंभ होने के साथ ही दूरस्थ अंचल में रहने वाले यात्रियों ने खुशी और रोमांच के साथ अपनी पहली हवाई उड़ान भरी। नारायणपुर से लगभग 52 किलोमीटर दूर टाहकाडोंड के लालूराम मंडावी प्रथम यात्री बने। नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ क्षेत्र के घने जंगलों के बीच बसे गांव के किसान लालूराम ने इस हवाई यात्रा को अविस्मरणीय बताया। मजदूर माता-पिता और दो भाइयों की दृष्टिबाधित बहन ग्राम गारेंगा की गुरुवारी कन्नौजिया ने इस यात्रा को नया अनुभव बताया। उसने बताया कि यह साल उसके लिए खुशियों भरा रहा है। इससे पहले उसके परिवार को प्रधानमंत्री आवास के रूप में पक्के मकान की सौगात मिली। उसने कहा कि आज उसने आसमान में सफर करने का सुहाना अनुभव लिया।

ग्राम आसना की तेंदूपत्ता संग्राहक हीरावती भी पहले सफर की सौभाग्यशालियों में शामिल रही। उसने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा हवाई चप्पल पहनने वालों के लिए भी हवाई यात्रा की सुविधा देने की सोच सचमुच साकार हो गई। इनके साथ प्रयास आवासीय कोचिंग में अध्ययन कर आइआइटी क्वालीफाइड राहुल कवाची, एनआइआइटी क्वालीफाइड हाटकचोरा की इंदु नेताम ने कहा कि बस्तर में हवाई यात्रा की सुविधा से पढ़ाई के दौरान वे अपने परिवार को खुद से अधिक दूर नहीं पाएंगे। बालीकोंटा की महिला सरपंच दयमंति कश्यप ने भी हवाई उड़ान भरी। उन्होंने कहा कि बस्तर में हवाई यात्रा की सुविधा से यहां विकास को गति मिलेगी। यहां की प्रतिभाएं भी अब महानगरों तक आसानी से पहुंचेंगी और बस्तर की सुंदर संस्कृति का विस्तार करेंगी। आपात चिकित्सा सेवा से लोगों की जान बच सकेंगी। इनके अलावा यमुना प्रताप (गुरुवारी का भाई), विशाखापटनम में विधि का छात्र विक्रमादित्य, स्थानीय सांसद दिनेश कश्यप व दो क्रू मेम्बर शामिल थे।

बता दें कि यह हवाई जहाज रायपुर से जगदलपुर, विशाखापट्टनम और उसके बाद भुवनेश्वर तक की उड़ान भरेगी। इस सुविधा के साथ ही अब रायपुर से जगदलपुर 40 मिनट में पहुंचा जा सकेगा। वहीं राजधानी रायपुर के बाद जगदलपुर दूसरा यात्री विमानसेवा वाला विमानतल बन गया है। जगदलपुर के विमानतल को 40 करोड़ रुपये खर्च कर अपग्रेड किया गया है। एयरपोर्ट के विस्तार में लगे दो साल

जगदलपुर विमानतल डीआरडीओ के संरक्षण में संचालित हो रहा था। नक्सल प्रभावित संभाग होने के चलते यहां वायुसेना के विमान एवं वीआईपी प्रवास के दौरान ही विमान लैंड होते रहे हैं। मौजूदा समय में बस्तर में पर्यटन की बढ़ती संभावनाएं तथा औद्योगिक विस्तार के चलते दो साल पूर्व यहां नागरिक उड्डयन सेवा प्रारंभ करने की जरूरत महसूस की गई। सात सात पहले वायुदूत सेवा की परियोजना बनाई गई थी पर विमानतल में आधारभूत संरचना के विकास के अभाव में वह नाकाम साबित हुई। इसके बाद एनएमडीसी के नगरनार इस्पात संयंत्र के स्थापना एवं तेजी से बदलते परिदृश्य के चलते राज्य सरकार ने घरेलू विमान सेवा से बस्तर को जोड़ने का निर्णय लिया। इस तारतम्य में कामचलाऊ एयरस्ट्रीप को एयरपोर्ट में तब्दील करने के लिए कवायद शुरू की गई।

रनवे की लंबाई सिविल एविएशन के अनुरूप बढ़ाई गई। साथ ही मोबाइल एयर ट्रैफिक कंट्रोल, टर्मिनल बिल्डिंग, सेंट्रल एयरकंडीशन हॉल समेत अन्य आवश्यक संसाधन विकसित किए गए। दो माह पूर्व ही एयरपोर्ट उड़ान के लिए पूरी तरह तैयार था लेकिन सिविल एविएशन के मानकों के अनुरूप लाइसेंसिंग प्रोसेस, तकनीकी परीक्षण आदि प्रक्रिया के चलते वायुसेवा का शुभारंभ नहीं हो सका था। तकनीकी टीम तथा एयरफोर्स के टेक्निकल विंग के हरी झंडी के बाद नागरिकों के लिए उड़ान का मार्ग प्रशस्त हो सका है। वर्तमान में यहां चार्टड प्लेन भी लैंड कर सकते हैं और जगदलपुर का एयरपोर्ट राजधानी के बाद सबसे बेहतर एयपोर्ट माना जा रहा है।