शुभम भटनागर, देवभोग। गरियाबंद जिले की यह सीट कई तरह की समस्याओं से ग्रस्त है। इस बार सुपेबेड़ा में किडनी की बीमारी से हो रही मौत का सिलसिला, नेशनल हाइवे का अधूरा निर्माण व बिजली चुनावी समर में बड़ा उलटफेर कर सकते हैं।

हालांकि जिला प्रशासन की टीम सुपेबेड़ा में इलाज के लिए डटी हुई है। स्कूलों में शिक्षकों की कमी बरकरार है। गांवों में खेतों को पानी नहीं मिल रहा है तो लो- वोल्टेज ने घरों की रोशनी और पंप के जरिए खेती की संभावना को क्षीण कर दिया है। इस सीट के वोटरों में समस्याओं और परेशानियों को लेकर गजब की जागरूकता है।


भूगोल : 55 से 60 फीसद क्षेत्र वनों ने घिरा हुआ है। मैनपुर, अमलीपदर, गोहरापदर और देवभोग इलाके में आय का प्रमुख स्रोत मक्के और धान की खेती है। यह विधानसभा उदंती, सीतानदी के सीमा पर बसी है।

शिक्षा : हायर एजुकेशन के लिए विद्यार्थियों को अन्य जिलों पर निर्भर रहना पड़ता है। शासन ने गोहरापदर में कॉलेज, देवभोग में आइटीआइ, कॉलेज भवन और कृषि कॉलेज को मंजूरी दी। स्कूली शिक्षा, उच्च और उच्चतर माध्यमिक शालाओं में आज भी विषयवार शिक्षकों की कमी बनी हुई है।

प्रशासन : बिंद्रानवागढ़ में एक-एक अनुविभाग कार्यालय के साथ-साथ तीन विकासखंड छुरा, मैनपुर और देवभोग आते हैं। इन तीनों विकासखंड में 150 से अधिक ग्राम पंचायतें हैं।

सड़क : बीते पांच सालों में सड़कों का जाल बिछाने का पूरा प्रयास हुआ है, लेकिन यहां की सड़कें भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गईं। कई सड़कों ने सालभर में ही दम तोड़ दिया। 1100 करोड़ रुपये की लागत से नेशनल हाइवे निर्माण की स्वीकृति के बाद भी काम शुरू नहीं हुआ है। पीएम सड़क का भी बुरा हाल है।

स्वास्थ्य : ब्लॉक मुख्यालय छुरा, मैनपुर में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तो है, लेकिन मरीजों को गरियाबंद की दौड़ लगानी पड़ती है। सीएम की घोषणा के बाद भी देवभोग में 50 बिस्तर अस्पताल की व्यवस्था पटरी पर नहीं है। देवभोग विकासखंड के मरीज पिछले 10 सालों से पड़ोसी राज्य ओडिशा पर निर्भर हैं।

आर्थिक : विधानसभा के 470 गांवों में से लगभग 200 गांवों के लोगों की आजीविका का प्रमुख जरिया कृषि है। बिजली के अलावा रबी फसलों के लिए सिंचाई साधन मौजूद नहीं होने के कारण यहां के किसान एक सीजन में धान की फसल लेकर दूसरे सीजन में रोजी-मजदूरी करते हैं। शेष गांव के 20 फीसद से अधिक लोगों का मुख्य व्यवसाय वनोपज संग्रहण है। उदंती सीतानदी के रिजर्व फॉरेस्ट इलाके में आने वाले 35 गांवों में रोजगार की समस्या हमेशा बनी रहती है।

घोषणाएं जो अब तक पूरी नहीं हुईं

- वर्ष 2014 में क्षेत्र के लिए 132 केवी बिजली सब स्टेशन की स्थापना की घोषणा की गई थी, लेकिन चार साल बाद भी यह नहीं बन सका।

- गोहरापदर को विकासखंड, देवभोग और मैनपुर को नगर पंचायत का दर्जा देने की घोषणा सीएम ने की, लेकिन इस ओर अब तक कोई पहल नहीं हुई।

-14 जनवरी 2008 को देवभोग को राजस्व अनुविभाग का दर्जा दिया गया, मगर देवभोग मुख्यालय में अनुविभाग के अधिकारियों की पदस्थापना 10 साल बाद भी नहीं हुई।

- मुख्यमंत्री ने देवभोग में शुद्ध पेयजल के लिए वाटर प्लांट की घोषणा की, लेकिन पीएचई विभाग द्वारा लो वोल्टेज का हवाला देकर वाटर प्लांट नहीं बनाने का प्रस्ताव दिया, जिसके चलते मुख्यमंत्री की घोषणा निरस्त हुई।


ये हो सकते हैं चुनावी मुद्दे

- हाई और हायर सेकंडरी स्कूलों में विषयवार शिक्षकों की कमी से पढ़ाई प्रभावित।

- सुपेबेड़ा में किडनी की बीमारी के 160 लोगों की मौत और 150 से अधिक गंभीर।

- रायपुर-देवभोग से होते हुए ओडिशा तक जाने वाले एनएच-130 के लिए 1100 करोड़ रुपये की स्वीकृति के बाद भी निर्माण कार्य रुका।

- अंचल में लो-वोल्टेज की समस्या, 60 के दशक में खींचे गए तारों के जरिए आज भी सुदूर वनांचल में बिजली पहुंचाई जा रही है, जिसके चलते गांवों में बिजली चिमनी की लौ की तरह जलती है।

- वोल्टेज के अभाव में अंचल में बिजली से चलने वाले लघु और कुटीर उद्योग नहीं चल पाते, जिसके चलते गांवों में बेरोजगारी का ग्राफ बढ़ा है।

- सिंचाई की कई परियोजना अधूरी है, जिसके चलते किसान रबी फसल नहीं ले पाते हैं।

अमीर धरती में गरीब लोग

मैनपुर के पायलीखंड, बेहराडीह, बाजाघाटी इलाके में हीरे के सात किंबरलाइट पाइप की पुष्टि सालों पहले हो चुकी है। सेनमुड़ा में कीमती अलेक्जेंडराइड की खदान है, लेकिन दोनांे के दोहन की नीति सरकार नहीं बना सकी है। तस्कर गैर कानूनी रूप से खदानों में पैर जमाए हुए हैं।

पिछले पांच साल में हुए विकास कार्य

- 13 करोड़ की लागत से तेल नदी के कुम्हड़ई घाट, गोहरापदर, बारूका घाट समेत 20 से भी ज्यादा उच्च स्तरीय पुल निर्माण कराया गया।

- 16 करोड़ रुपये के 92 छोटे-बड़े पुल-पुलियों का निर्माण गत चार साल में हुआ।

- देवभोग में आइटीआइ भवन, कॉलेज भवन, कृषि विद्यालय की मंजूरी मिली है।

- देवभोग में 50 बिस्तर अस्पताल, गोहरापदर में महाविद्यालय की मंजूरी मिली है।

- 30 करोड़ से भी ज्यादा लागत के दर्जनभर छोटी-बड़ी सिंचाई योजनाओं से किसानों को थोड़ी राहत मिली है।

इनके बोल

अब तक हमने अपने विधानसभा क्षेत्र में 12 अरब रुपये का काम करवाया है, जिसमें पानी के लिए एनीकट व नहर को प्रमुखता में रखा गया है। शिक्षा के लिए हाई व हायर सेकंडरी स्कूल का निर्माण हुआ है इसके अलावा अभी 77 स्कूल निर्माणाधीन हैं। हम हर तरह से विकास के लिए तत्पर हैं और क्षेत्र के प्रत्येक व्यक्ति से सीधे जुड़े हुए हैं। इस विधानसभा में समाज के अंतिम व्यक्ति तक शासन की योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए हरसंभव प्रयास किया गया है। लोगों को सभी सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं। सभी विकासखंडों को ओडीएफ घोषित करवाया गया है। विधानसभा के लोग अब खुले में शौच के लिए नहीं जाते हैं। मैनपुर और देवभोग में 100-100 बिस्तर का अस्पताल शुरू करवाया गया है।

- गोवर्धन मांझी, विधायक बिंद्रानवागढ़

कुछ स्थानों पर पुल-पुलियों का निर्माण तो कराया है, लेकिन उन स्थानों पर नहीं कराया जहां ज्यादा जरूरी था। यहां के 60 के अधिक गांव लालटेन के भरोसे गुजारा करते हैं। किसानों को बीमा राशि का भुगतान नहीं किया गया। गोहरापदर जलाशय और तेलनदी पर बन रहे एनीकट का काम अधूरा है। स्वास्थ्य के क्षेत्र में मैनपुर और देवभोग में 100-100 बिस्तर का अस्पताल तो खोला गया, लेकिन सुविधाएं नहीं दी गईं। सुपेबेड़ा में किडनी की बीमारी से मौत का सिलसिला जारी है। इसे रोक पाने में शासन पूरी तरह विफल है।

-जनकराम ध्रुव, कांग्रेस प्रत्याशी विस चुनाव 2013

मतदाताओं का गणित

कुल मतदाता- 2,04,099

पुरुष-101051

महिला-103048

कुल मतदान केंद्र -260

दो चुनावों में चेहरा बदलकर जीती भाजपा

बीते दो चुनावों में यह सीट भाजपा के खाते में गई, लेकिन दोनों बार जीतने वाले प्रत्याशी अलग- अलग थे। 1993 में कांग्रेस के ओंकार शाह ने भाजपा के चरण सिंह मांझी को हराया था। 1998 में मांझी, शाह को हरा कर विधानसभा पहुंचे। राज्य बनने के बाद हुए पहले चुनाव में कांग्रेस के टिकट से फिर शाह मैदान में उतरे, जबकि भाजपा ने गोवर्धन सिंह मांझी को टिकट दिया। शाह जीतकर विधानसभा पहुंच गए। 2008 में फिर कांग्रेस ने शाह पर ही भरोसा जताया, लेकिन भाजपा ने गोवर्धन सिंह के स्थान पर डमरूधर पुजारी को टिकट दिया। भाजप का यह प्रयोग सफल रहा। शाह 16 हजार से अधिक मतों से हार गए। 2013 में दोनों पार्टियों ने प्रत्याशी बदला। भाजपा ने 2003 में चुनाव हार चुके गोवर्धन सिंह को टिकट दिया तो कांग्रेस ने जनक ध्रुव को। प्रत्याशी बदलने का फायदा भाजपा को मिला और गोवर्धन 30 हजार से अधिक मतों के अंतर से जीतकर विधानसभा पहुंच गए।