रायपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। राज्य के किसी धार्मिक स्थल से अगर कभी 'भगवान' गायब हुए तो उनकी खोजबीन विदेशों तक में होगी। देशभर के सभी राज्यों में सर्कुलर जारी होगा...। यह सुनने में जरा अटपटा-सा लगता है, लेकिन पुरातत्व विभाग की नई योजना के तहत कुछ ऐसा ही होने जा रहा है। जी हां, प्राचीनतम ऐतिहासिक प्रतिमाओं, जिनमें देवी-देवता की मान्यता है, उसकी नंबरिंग कर बाकायदा रजिस्टर्ड किया जा रहा है। अगर अपने स्थल से कभी प्रतिमाएं गायब हुईं, उनका पता लगाने के लिए नंबरिंग के बाद रजिस्ट्रेशन के सहारे पता ढूंढ़ने के लिए राज्यभर में मदद ली जाएगी। ऐतिहासिक प्रतिमाओं व दुर्लभ चीजों के विदेश पहुंचने की भनक लगी कि सर्कुलर जारी कर इंटरपोल पुलिस को सूचना दी जाएगी।

इसका जिम्मा स्थानीय पुलिस को सौंपा जाएगा, जो पत्र व्यवहार के जरिए प्रदेश से खोई हुई ध्ारोहर के बारे में साक्ष्य प्रमाण जुटाएगी। पुरातत्व विभाग में एक वरिष्ठ अधिकारी ने नए सिस्टम की तैयारी के बारे में बताया है। प्रदेशभर से करीब सौ प्रतिमाओं का रजिस्ट्रेशन करने कवायद तेज करने की जानकारी दी है। उनके बताए अनुसार ऐसी प्रतिमाएं, जो प्राचीन समय की है, डेढ़ हजार से दो हजार वर्ष पुरानी हैं, बरसों की खोदाई के बाद जमीन की कोख से बाहर निकली हैं, उनका आर्कोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया ने प्रतिमाओं का रजिस्ट्रेशन करके सेंट्रलाइज्ड डाटा बेस बनाने को कहा है।

इसी तर्ज पर प्रदेश में तैयारी है। दुर्लभ प्रतिमाओं व ऐतिहासिक चीजों को चिन्हांकित कर उनका ब्योरा तैयार किया जा रहा है। किसी दूसरे देश में आरोपियों की खोजबीन के लिए स्थानीय पुलिस रेड कॉर्नर नोटिस जारी करती है। इसी के सहारे इंटरपोल का सहारा लिया जाता है। छत्तीसगढ़ राज्य में सीआइडी के माध्यम से केंद्रीय गृह मंत्रालय और फिर यहां से विदेशी पत्र व्यवहार के जरिए प्रकरण सुलझाया जाता है। प्रतिमाओं व धार्मिक स्थलों से ऐतिहासिक धरोहर गायब होने की स्थिति में सर्कुलर जारी करके छानबीन का प्रयास होगा।

फिलहाल छत्तीसगढ़ सुरक्षित दूसरे राज्यों में खतरा

पुरातत्व विभाग की रिपोर्ट में फिलहाल प्रदेश में कहीं भी दुर्लभ प्रतिमाएं चोरी कर उसे विदेश ले जाने की घटना सामने नहीं आई है, लेकिन देश के दूसरे प्रांतों में ऐसी वारदात होने की जानकारी मिलती रहती है। आर्कोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया द्वारा देशभर से ऐतिहासिक प्रतिमाओं का रिकॉर्ड जुटाया जा रहा है। अपने प्रदेश से करीब सौ बड़ी ऐतिहासिक प्रतिमाओं की नंबरिंग चल रही है।

ऐतिहासिक दुर्लभ प्रतिमाएं

23 वें तीर्थंकर पार्श्वनाथ की प्रतिमा धनपुर, फरसपाल ऐतिहासिक गणेश प्रतिमा, प्राचीन टीला स्थित बुद्ध प्रतिमा, नगपुरा पार्श्वनाथ प्रभु की प्राचीन प्रतिमा, रतनपुर महामाया देवी प्रतिमा, ताला-रुद्रशिव की प्रतिमा, प्रभु ऋषभदेव की कलात्मक कांस्य प्रतिमा आदि।

राज्य में दुर्लभ ऐतिहासिक प्रतिमाओं की सुरक्षा के लिए अब रजिस्ट्रेशन किया जा रहा है। नए नियम के मुताबिक सुरक्षा के इंतजाम किए जा रहे हैं। देश से गायब प्रतिमाओं के विदेश में होने की सूचना मिली, इंटरपोल पुलिस की मदद ले सकेंगे। - राहुल सिंह, उपसंचालक राज्य पुरातत्व विभाग