रायपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

इंडियन मेनोपॉज सोसायटी द रायपुर चैप्टर दो दिवसीय राज्य स्तरीय सम्मेलन का आयोजन कर रहा है। इसमें देश भर से 200 से अधिक डॉक्टर हिस्सा ले रहे हैं। शनिवार को सम्मेलन का आगाज हुआ। मुख्य अतिथि संस्थापक चैप्टर सेक्रेटरी और संरक्षक डॉ. आभा सिंह ने कहा कि अपने जीवनकाल में हर पांच महिलाओं में से एक अवसाद से पीड़ित होती है। पीड़ित होने का कारण मोनोपॉज (रजोनिवृत्ति) होता है। सम्मेलन का विषय था 'परिमेनोपॉज व रजोनिवृत्ति के दौरान स्त्री रोग संबंधी परेशानियां'। इस पर विशेषज्ञों ने अपनी बात रखी। हर महिला का रजोनिवृत्ति का अनुभव अलग होता है। अधिकांश महिलाओं में ऐसे लक्षण पाए जाते हैं जो उनके व्यक्तिगत, पारिवारिक एवं कामकाजी जीवन पर नकारात्मक प्रभाव डालते हैं। रजोनिवृत्ति कई अलग-अलग लक्षण उत्पन्न कर सकती है। कारण है-एस्ट्रोजन। यह मुख्य हार्मोन है जो कि रजोनिवृत्ति के दौरान आपके शरीर में कम हो जाता है। यह आपके शरीर के कई अलग-अलग भागों को प्रभावित करता है जैसे मस्तिष्क और आपकी भावना। प्रारंभिक रजोनिवृत्ति वह रजोनिवृत्ति है जो 40 से 45 वर्ष की उम्र के बीच शुरू होती है। समय से पहले रजोनिवृत्ति 40 साल से पहले भी शुरू हो सकती है। डॉ. सुषमा वर्मा ने बताया कि कैंसर होने से पहले शारीरिक बदलाव जो कि स्तन एवं बच्चेदानी में होते हैं उनकी जांच एवं इलाज से कैंसर को होने से रोका जा सकता है। कैंसर से होने वाली मृत्यु दर को बहुत काम किया जा सकता है।

महिलाओं को पेरिमोनोपॉज के दौरान निम्न लक्षण होते हैं- मासिक स्राव में बदलाव, हॉट फ्लॅशेस, रात को पसीना, नींद न आना, थकान, चिंता, कामेच्छा या सेक्स ड्राइव में कमी, योनि में सूखापन, स्तन में कोमलता, सूजन, दर्द और मांसपेशियों और जोड़ो में दर्द।