बिलासपुर। बहुत से मामले में तनाव की वजह से गुस्सा आता है। यदि लगातार गुस्सा आने की शिकायत हो रही है तो यह मनोरोग के प्रारंभिक लक्षण हो सकते हैं। उपचार के माध्यम से यह सिम्टम दूर हो जाता है। हैलो नईदुनिया में पाठक द्वारा पत्नी को गुस्सा आने को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में सिम्स के मनोरोग डिपार्टमेंट के एचओडी व वरिष्ठ मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. सुजीत नायक ने यह बात कही। मनोरोग से संबंधित समस्याओं से जुड़ी इसी तरह की कई अन्य आशंकाओं का समाधान उन्होंने किया।

डॉ. सुजीत नायक बुधवार को नईदुनिया कार्यालय में दोपहर 12 बजे से एक बजे तक उपस्थित रहे। उन्होंने हैलो नईदुनिया कार्यक्रम के तहत फोन पर पाठकों की मनोरोग से संबंधित समस्याओं का समाधान किया। इस अवसर पर उन्होंने मुख्य परीक्षा का समय होने पर छात्र-छात्राओं का भी मार्गदर्शन किया।

उन्होंने कहा कि परीक्षा सिर पर है, जाहिर है छात्र-छात्राओं में तनाव आएगा। परीक्षा का डर भी उन्हें सताएगा। यदि यह डर लगातार बढ़ता जाएगा तो इसका असर परीक्षा परिणाम पर जरूर दिखेगा।

इसलिए सबसे पहले परीक्षा का डर दूर करना जरूरी है। इसके बाद टाइम मैनेजमेंट के तहत परीक्षा पास करने के लिए वैसा लक्ष्य बनाएं, जिसे वे कम अवधि में पूरा कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि फेल व पास के फेर में न फंसते हुए सकारात्मक विचार से पढ़ाई करें, सफलता जरूर मिलेगी। एक घंटे तक लगातार पाठकों के फोन आते रहे। इस दौरान नईदुनिया के संपादक डॉ.सुनील गुप्ता और यूनिट हेड सचिन बटाविया भी उपस्थित रहे।

पाठकों ने रखी अपनी समस्या, मिला समाधान

सवालः परीक्षा के डर से बच्चा परेशान है।

- रमेश पाठक, तखतपुर

जवाबः लाजमी है कि परीक्षा के समय पर बच्चों को डर लगता है। 10वीं बोर्ड की परीक्षा अत्यधिक अहम रहती है। वर्तमान में तैयारी के लिए बहुत कम समय बचा है। यह जानकारी मुझे है, इसलिए कम समय में ज्यादा पढ़ाई के लिए टाइम मैनेजमेंट का सहारा लें। पढ़ाई के दौरान हर आधे घंटे में ब्रेक लेकर पढ़ाई करें। दिमाग में उल-जुलूल सोच न लाए। डर अपने आप हट जाएगा।

सवालः बच्चा याददास्त खोता जा रहा है।

- मालानिशा, कोरबा

जवाबः आपका बच्चा 13 साल का है, ऐसे में दिमाग शॉर्प रहता है। उसे कुछ याद नहीं रहता है तो यह गंभीर परिस्थिति है। यदि व चुप रहता है अन्य बच्चों के साथ नहीं खेलता है तो काउंसिलिंग करने की आवश्यकता है। इसी के बाद यह पता चल पाएगा कि बच्चे के दिमाग में क्या चल रहा है। बच्चा छोटा है, इसलिए उपचार संभव है।

सवालः परीक्षा आने पर बीमार हो जाती है।

- रश्मि पटेल, परिजात कॉलोनी, बिलासपुर

जवाबः बच्चों के साथ अक्सर ऐसा होता है। सामान्य रूप से देखा गया है कि 10वीं, 12वीं की परीक्षा को हौव्वा बनाकर बच्चों के सामने पेश किया जाता है। बच्चे छोटी उम्र में 10वीं, 12वीं की परीक्षा को महत्वपूर्ण मानते हैं और जब इसे फेस करते हैं तो उस वक्त डरे रहते हैं। इसी वजह से कई बच्चे इस समय बीमार पड़ने लगते हैं। परीक्षा के प्रति सकारात्मक विचार रखने से यह समस्या दूर हो जाएगी।

सवालः मेरी वाइफ को गुस्सा बहुत आता है।

- संदीप गुप्ता, बिलासपुर

जवाबः गुस्सा आना तो मानवीय क्रिया है। यदि यह प्रवृत्ति धीरे-धीरे बढ़ रही है तो फिर इसे लेकर सोचना जरूरी है। उन्हें गुस्सा आने के कारणों का पता लगाना जरूरी है। इसके बाद ही उनकी मनोदशा का पता चल पाएगा। यह मानसिक रोग के भी लक्षण हो सकते हैं। काउंसिलिंग और दवा के माध्यम से इसका उपचार किया जाता है।

सवालः परीक्षा का नाम सुनकर तनाव आता है।

- संदीप तिवारी, बलौदा

जवाबः आप अभी पीजीडीसीए का एक्जाम देने वाले हैं और परीक्षा के दौरान तनाव आने कि यह समस्या आपकी पुरानी है तो, इसमें आपको अपनी पढ़ाई का पैटर्न बदलना होगा। तनाव लेने का असर आपके परीक्षा परिणाम पर पड़ता है। इसलिए अच्छा है कि बिना तनाव लिए परीक्षा में बैठें, इसके सकारात्मक परिणाम आपको तो मिलेगा और तनाव लेने जैसी समस्या से भी निजात मिल जाएगी।

सवाल- मेरे बच्चे कुछ विषय में होशियार तो कुछ में कमजोर है।

सुजाता केशरवानी, पेंड्रा

जवाबः यह कोई परेशानी नहीं है। ऐसा हर बच्चे के साथ होता है। प्रायः सभी बच्चों को इस तरह की परेशानी झेलनी पड़ती है। यदि किसी विषय में एकदम तेज है और किसी विषय में एकदम कमजोर है तो इस पर ध्यान देना जरूरी है। बच्चा 10 साल का है तो मागदर्शन के सहारे उसकी इस समस्या को दूर किया जा सकता है। या फिर उम्र बढ़ने के साथ ही यह समस्या खुद-ब-खुद दूर हो जाएगी।

सवालः परीक्षा के लिए कम समय बचा है, किस तरह से पढ़ाई करें।

- बसंत प्रजापति, कालीपुर, सूरजपुर

जवाबः यह एक अच्छा प्रश्न है कि कम समय में परीक्षा के लिए पढ़ाई किस तरह से किया जाए। इस तरह की उलझन लगभग सभी बच्चों को रहती है। वहीं अब जितना समय बचा है उसके हिसाब से टाइम मैनेजमेंट करें और सभी प्रश्नों का हल करने की कोशिश न करें, पिछले साल का पेपर देखें, उसके हिसाब से प्रश्नों का चयन कर छोटे-छोटे लक्ष्य बनाते हुए पढ़ाई करें, सफलता जरूर मिलेगी।

सवालः दिनभर पढ़ाई कर रही हूं, कुछ इफेक्ट तो नहीं पड़ेगा।

- रीना, मरवाही

जवाबः दिनभर लगातार पढ़ाई करने का साइड इफेक्ट तो होगा ही। परीक्षा को हौव्वा मत बनाओ। पढ़ाई कर रहे हो तो हर आधे घंटे में ब्रेक लो। वह काम करो, जिससे तुम्हें अच्छा लगता है। हो सके तो अपने पुराने रूटीन के हिसाब से पढ़ाई करो। अगर संभव हो तो बीच-बीच में ग्रुप डिस्कशन करो। पढ़ाई के लिए टाइम टेबल बना लें।

सवालः परीक्षा होने वाली है, इसलिए डर लग रहा है।

- रवि खलसो, मुल्ताई, मध्यप्रदेश

जवाब : परीक्षा में थोड़ा-बहुत डर तो लगता है। यह मनोवृत्ति है। बिना डर के पढ़ाई करो। इसके अलावा सोने का समय निर्धारित करो, खानपान पर ध्यान दो, पढ़ाई के दौरान हर आधे घंटे में ब्रेक लो। मन में सकारात्मक विचार लाओ। इससे धीरे-धीरे डर कम होने लगेगा। पढ़ाई भी अच्छे से होने लगेगा। परीक्षा परिणाम भी बेहतर आएगा।

सवालः ध्यान नहीं लगता है और भूल भी जाता हूं।

- आकाश वर्मा, बिलासपुर

जवाबः आपने बताया कि आप 12वीं की परीक्षा देने वाले हैं। पर पढ़ाई पर ध्यान नहीं लगता है और जो पढ़ रहे हैं उसे भी जल्दी ही भूल जाते हैं। इससे साफ है कि आपकी पढ़ाई करने का तरीका सही नहीं है। पहले तो अपने अंदर से परीक्षा के डर को बाहर निकालें और प्रश्नों व उसके उत्तर को रोचक बनाते हुए पढ़ें। समझें कि ऐसा क्यों है, तब पढ़ाई में ध्यान भी लगेगा और भूलने की समस्या भी दूर हो जाएगी।

सवालः मन में शंका रहती है कि पढ़ाई में कुछ छूट रहा है।

- चंद्रशेखर साहू, लोरमी

जवाबः मन में शंका रहना ही डर का द्योतक है। आप परीक्षा को लेकर अंदर से भयभीत हैं। इस शंका को हटाकर अपनी पढ़ाई करें और बीच-बीच में ब्रेक लें। सफलता आपके ऊपर निर्भर है। डरने से सिर्फ परीक्षा परिणाम ही प्रभावित होगा। इसलिए इस भाव को मन से निकालकर परीक्षा दें, सकारात्मक परिणाम मिलेगा।

सवालः दवा के बाद भी फायदा नहीं मिल रहा

- सुनील वाधवानी, बिलासपुर

जवाबः आपके 25 साल के बच्चे को ऐसा लगता है कि कोई उसका मजाक उड़ा रहा है और उसी उधेड़बुन में उलझा रहता है। काम नहीं करता है। जिसकी दवाई भी चल रही है पर फायदा नहीं हो रहा है। इसका मतलब है कि दवा काम नहीं कर रहा है। दवा बदलने की जरूरत है। डॉक्टर से सलाह लेकर दवा बदलें, फायदा जरूर मिलेगा।

सवाल- आत्महत्या जैसे मामले कैसे कम किया जा सकता है।

- डॉ. खुर्शीद खान, धरमजयगढ़

जवाबः सुसाइड करने वाला व्यक्ति अक्सर मनोरोग से ग्रसित होता है। डिप्रेशन व अत्यधिक नशे का दुष्प्रभाव सुसाइड के लिए प्रेरित करता है। यदि कोई एक ही शख्श बार-बार सुसाइड करने का कोशिश कर रहा है तो यह गंभीर स्थिति है। व्यक्ति पूरी तरह से मनोरोगी है। इसका उपचार कराना बेहद जरूरी है। डिप्रेशन का उपचार दवा से होता है।

सवाल- एक साल से डिप्रेशन की समस्या है।

- रमेश कुमार साहू

जवाबः डिप्रेशन होने की वजह जानें और उस वजह को खत्म करने की कोशिश करें। एक साल से समस्या हो रही है तो इसका मतलब है कि समस्या बढ़ रही है। काउंसिलिंग की आवश्यकता है। इससे वास्तविक कारणों का पता चल पाएगा। इसके बाद जरूरत पड़ी तो दवा से इस समस्या को दूर किया जा सकता है।

सवालः लंबे समय से शराब पी रहे हैं और उल्टा-सीधा बड़बड़ाते हैं

- मिसेस सुनीता

जवाबः लंबे समय से व अत्यधिक मात्रा में शराब पीने से दिमाग पर असर पड़ता है। हो सकता है कि नशे में होने के कारण उल्टा-सीधा बढ़बढ़ाते हैं। यदि यह लंबे समय से चल रहा है तो मनोरोग चिकित्सक से सलाह लें। जांच व काउंसिलिंग के बाद इसका उपचार किया जा सकता है। लेकिन सबसे पहले उन्हें शराब की लत छोड़नी होगी।

सवालः शरीर में सूजन आते जा रहे हैं।

- निलेश यादव, बिल्हा

जवाबः शरीर में सूजन आने का संबंध मनोरोग से नहीं है। शरीर भी सूजने की जानकारी आपने दी है। सबसे पहले तो थाइराइड जांच कराएं। संभवतः यह थाइराइड का मामला है। जांच में पुष्टि हो जाएगी। यदि नहीं है तो डॉक्टर इसका भी उपचार करेंगे। तत्काल डॉक्टर से परामर्श लेना जरूरी है। वजन बढ़ना और सूजन आना मानव शरीर के लिए सही नहीं है।

सवालः सपना हकीकत होता लगता है।

- धर्म सिंह ठाकुर

जवाब- सपना देखने के बाद अगली सुबह उसी को देखने का आभास होना मनोरोगी होने के लक्षण हैं। आपको तत्काल काउंसिलिंग की आवश्यकता है। तत्काल किसी मनोरोग चिकित्सक से परामर्श लें। इन बातों का कारण जानने के बाद ही इसका उपचार संभव हो सकेगा।