रायपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

द्वापर युग में भगवान ने श्रीकृष्ण अवतार में अपने बचपन के मित्र सुदामा की निर्धनता दूर कर उसे धन-धान्य से मालामाल कर दिया। सुदामा की हालत देखकर श्रीकृष्ण ने बिना मांगे धन-दौलत, महल, नौकर-चाकर सब कुछ देकर संदेश दिया कि यदि मित्र संकट में हो तो उसकी मदद करनी चाहिए। गरीब मित्र से दूरी नहीं बनानी चाहिए। हर दिन एक सा नहीं होता। गरीब मित्र की मदद करने के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए। ये बात सुदामा-श्रीकृष्ण प्रसंग में आचार्य सत्यनारायण तिवारी ने कही।

महाआरती में उमड़े भक्त

जगन्नाथ मंदिर में सुदामा प्रसंग के बाद यदुवंश के खत्म होने और एक बहेलिए द्वारा श्रीकृष्ण के पैर के अंगूठे में तीर मारे जाने से बैकुंठ धाम जाने, भागवत कथा सुनकर राजा परीक्षित को मोक्ष मिलने तक की कथा सुनाई। भगवत गीता के संदेश और तुलसी वर्षा, हवन, पूजन, प्रसाद वितरण के साथ कथा का समापन हुआ। सहयोगी आचार्य के रूप में पं. हिमांशु कृष्ण शास्त्री एवं पं. निखिल दुबे ने व्यासपूजा एवं परायण किया। कथा के मुख्य यजमान अहिल्या दुष्यंत तिवारी, ममता तिवारी, अक्षत तिवारी ने पूजन आरती एवं अतिथियों का स्वागत किया। कथा समापन पर हुई महाआरती में डॉ. कीर्तिभूषण पांडेय, पं. उमाशंकर तिवारी, सूर्यकांत शर्मा, डॉ.अनिल पांडेय, रूपेंद्र द्विवेदी, नीलकण्ठ त्रिपाठी, शुभम तिवारी, अक्षताचार्य समेत काफी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।