रायपुर। लोकसभा में सीपीआई (एम) और डीएमके के 16 सांसदों ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को पत्र लिखकर बस्तर में शांति के लिए सुझाव दिया है। सांसदों ने कहा है कि आइजी कल्लूरी के बस्तर के कार्यकाल की जांच की जाए। फर्जी मुठभेड़ और गिरफ्तारी करने वाले सुरक्षाबलों की भूमिका की भी जांच की जाए और दोषी अफसरों, जवानों को सजा दिलाई जाए।

पत्र में जितेंद्र चौधरी, मोहम्मद सलीम, पी करूणाकरन, एमबी राजेश, एलमाराम करीम समेत सीपीएम के सांसदों के साथ ही डीएमके के राज्यसभा सांसद तिरूची शिवा व अन्य के हस्ताक्षर हैं। सांसदों ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को विजय की बधाई देते हुए कहा है कि आप जानते हैं आपका राज्य का बड़ा हिस्सा नक्सलवाद से ग्रस्त है।

आदिवासी पुलिस और नक्सली हिंसा के बीच फंसे हुए हैं। आदिवासी अधिकार राष्ट्रीय मंच समेत कई संगठनों ने बस्तर में सुरक्षा बलों द्वारा आदिवासियों पर की गई हिंसा को उजागर किया है। सलवा जुड़ूम पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद कई मामले एनएचआरसी में भी भेजे गए हैं।

आइजी कल्लूरी के खिलाफ की गई शिकायतों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं पर फर्जी मामले दर्ज करने के बाद उन्हें बस्तर से बाहर ट्रांसफर किया गया लेकिन जो नियम विरूद्ध काम उन्होंने किए उसकी सजा नहीं दी गई। सांसदों ने मांग की है कि बस्तर में पिछले पांच साल के दौरान हुई हिंसा की जांच की जाए। फर्जी मुठभेड़ों और गिरफ्तारियों के सभी मामलों की जांच की जाए।

यह हैं सांसदों की मांगें

- विभिन्न परियोजनाओं के लिए आवंटित जमीनों की सुनवाई के लिए पारदर्शी और लोकतांत्रिक व्यवस्था की जाए। जमीनों के आवंटन में वनाधिकार कानून का पालन किया जाए।

- फर्जी मुठभेड़, फर्जी सरेंडर और गिरफ्तारी, आदिवासी महिलाओं से रेप की घटनाओं की जांच हो और जिम्मेदार अफसरों को दंडित किया जाए।

- आइजी एसआरपी कल्लूरी के कार्यकाल की जांच की जाए। मनमानी हिंसा के लिए उनकी जिम्मेदारी तय की जाए। उनका प्रमोशन और महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्ति रोकी जाए।

- पत्रकारों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, वकीलों पर दर्ज फर्जी प्रकरणों को खत्म किया जाए।

- राज्य और नक्सलियों के बीच चल रही हिंसा को खत्म कर शांति लाने के लिए लोकतांत्रिक प्रक्रिया शुरू की जाए।

- हिंसा की वजह से विस्थापित हुए आदिवासियों के पुनर्वास की योजना तैयार की जाए।