बिलासपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

हावड़ा-पोरबंदर एक्सप्रेस के एसी कोच में दो वेंडर पैकेट बंद खाना बेचने के लिए पहुंच गए। उस कोच में जोन के विजिलेंस अफसर मौजूद थे। वेंडर को देखकर अफसर बेहद नाराज हुए। दरअसल इस ट्रेन में पेंट्रीकार है। इसके बावजूद बाहरी वेंडर घुस गया था। उन्होंने पूछताछ की। इसके बाद दोनों को आरपीएफ के हवाले कर दिया गया। वेंडरों के खिलाफ आरपीएफ ने रेलवे अधिनियम के तहत अपराध दर्ज किया।

मामला एसी -दो का है। ट्रेन लेट थी। सुबह करीब 10.15 बजे बिलासपुर पहुंची। जोन के दो से तीन विजिलेंस अफसर कोच में मौजूद थे। इसी बीच 20 से 25 पैकेट खाना पैकेट रखे हुए दो वेंडर पहुंचे और बेचने के लिए जोर-जोर आवाज लगाने लगे। उनकी हुलिया देखकर समझ आ गया कि यह पेंट्रीकार के कर्मचारी नहीं हैं और अवैध तरीके से खाना बेचने के लिए ट्रेन में चढ़े हैं। अफसरों ने इसी संदेह पर वेंडरों को रुकवाया। इसके बाद उनसे पूछताछ की। अचानक जानकारी से वेंडरों के हाथ- पांव फूलने लगे। वह ऐसा कोई जवाब नहीं दे सके। बिना अनुमति खाना बिक्री देखकर तत्काल आरपीएफ को बुलवाया गया। इसके बाद मामले से अवगत कराते हुए जांच कर कार्रवाई करने के लिए उनके हवाले कर दिया गया। आरपीएफ ने जांच के बाद पाया गया दोनों अवैध ढंग से खाना बेच रहे थे। लिहाज उनके खिलाफ कार्रवाई की गई।

वर्दी में कैमरा पर नहीं था चालू

जांच के दौरान जिस आरपीएफ के जवान को बुलाया गया। उसने कंधे के पास कैमरा रखा था। यह आरपीएफ की नई व्यवस्था है। अफसरों ने उनसे जानकारी ली। साथ ही यह पूछा कि वेंडर की रिकार्डिंग कैमरे में हुई या नहीं। इस पर जवान ने बताया कि बैटरी डाउन है। बताया जा रहा है कि आरपीएफ पोस्ट में दिए गए कैमरे की चार्जिंग में दिक्कत आ रही है। पूरी चार्जिंग के बाद भी बैटरी उतर जा रही है। यही वजह है कि बुधवार को कैमरे के साथ सर्चिंग करने की विधिवत शुरुआत नहीं हो सकी।