जगदलपुर। माचकोट जंगल के सघन वन क्षेत्र में बसे कावापाल के ग्रामीण को सरकारी मोबाइल तो मिला है पर नेटवर्क नहीं मिला, इसलिए ग्रामीण 50 फीट ऊंचे पेड़ पर चढ़ काल करते हैं। कहने को यह गांव सड़क मार्ग से जुड़ गया है लेकिन स्वास्थ्य सुविधा को अभी भी तरस रहा है। गांव में कोई गंभीर होता है तो ग्रामीण रात के वक्त भी पेड़ पर चढ़ कर संजीवनी एक्सप्रेस को बुलाने का प्रयास करते है।

जिला मुख्यालय से धनपुंजी, माचकोट, तीरिया मार्ग से होकर कावापाल की दूरी 53 किमी है, वहीं जगदलपुर से धनियालूर, पुसपाल रास्ते से कावापाल पहुंचने पर करीब 35 किमी लंबी कष्टप्रद यात्रा करनी पड़ती है, चूंकि दोनों ही मार्ग काफी खराब है। बारिश के चार महीने तो यहां मोटरसाइकल से भी जाना दूभर है। इस गांव के दर्जनों परिवार को भी संचार क्रांति योजना के तहत सरकारी मोबाइल मिला है परन्तु इलाके में नेटवर्क का अभाव है। आसपास की पहाड़ी के ऊपर चढ़ने पर ही नेटवर्क मिल पाता है।

बीमार आदमी को किसी तरह इलाज मिल जाए इसलिए ग्रामीणों ने एक तरीका खोजा है। ग्रामीणों ने पाया कि किसी ऊंचे पेड़ पर चढ़ने से नेटवर्क मिलता है, इसलिए पंचायत पारा के एक ऊंचे इमली पेड़ पर चढ़ने के लिए 50 फीट लंबी सीढ़ी बनाई गई है। जब भी किसी से जरूरी बात करनी हो ग्रामीण इस सीढ़ी से होकर पेड़ के शीर्ष में पहुंच बतियाते हैं।

कावापाल सरपंच कमलोचन बताते हैं कि तीन साल पहले ग्रामीणों ने इस मजबूत सीढ़ी का निर्माण किया था। इस पर बच्चों को चढ़ने की मनाही है, वहीं सुरक्षा के हिसाब से बारिश के समय बड़ों को भी इस पर चढ़ने नहीं दिया जाता। उन्होने बताया कि तीरिया (53) और पुसपाल (35) मार्ग खराब है इसलिए संजीवनी और महतारी एक्सप्रेस कावापाल तक नहीं आ पाती। उक्त सड़क को दुरूस्त करने की मांग की जा रही है, लेकिन ऐसा नहीं हुआ इसलिए

कावापाल के ग्रामीणों से साढ़े चार किमी लंबे वनमार्ग का जंगल काट पहुंच मार्ग बनाने की कोशिश की है। इसके चलते यहां के 56 ग्रामीणों को साल भर पहले जेल जाना पड़ा था।