रायपुर (राज्य ब्यूरो)। अपनी विशिष्ट सुगंध के लिए पूरी दुनिया में मशहूर दमिश्क गुलाब की सुगंध से अब छत्तीसगढ़ का दंडकारण्य पठार व अमरकंटक का इलाका महकेगा। बस्तर में इसकी खेती प्रारंभ की गई है। अब दिन दूर नहीं जब यह गुलाब यहां अपनी बादशाहत स्थापित करने के साथ ही साथ किसानों की आर्थिक स्थिति को सुदृढ करेगा। दमिश्क गुलाब से बने सुगंधित तेल वैश्विक बाजार में तीन से चार लाख रुपये प्रति किलो के भाव से बिकते हैं।

दमिश्क गुलाब वैसे तो गुलाब की उम्मा प्रजातियों में है और प्रत्येक स्थान पर पाए जाते हैं पर बस्तर में पहली बार इनकी खेती व्यापारिक दृष्टिकोण से की गई है। शुरूआत में इस प्रजाति के सात हजार पौधे रोपित किए गए हैं। धीरे धीरे पूरे इलाके में किसानों को इसकी खेती से जोड़ा जाएगा। दमिश्क गुलाब की खेती की एक खाशियत यह भी है कि इसकी खेती किसी प्रकार की मिट्टी में हो जाती है और पानी की आवश्यकता बहुत कम होती है। देहरादून क्षेत्र में किसान इसकी खेती को अपना चुके हैं और अच्छी आमदनी कर चुके हैं।

प्रति हेक्टेयर चार लाख की आमदनी

दश्मिक गुलाब तेल ताजा फूलों के भांप आसवन द्वारा निकाला जाता है। गुलाब फूल 30 से 40 कुंतल प्रति हेक्टेयर होता है, जिसमें गुलाब तेल 750 ग्राम से एक किलोग्राम प्रति हेक्टेयर पैदा होता है। इसका मूल्य चार से पांच लाख रुपया है। इस तरह से किसान अपनी आर्थिक स्थिति को सुदृढ कर सकते हैं।

उपलब्ध है विश्वव्यापी बाजार

अच्छी गुणवत्ता के गुलाब के तेल की भारी मांग है मां दंतेश्वरी हर्बल समूह ने विश्व की चुनिंदा कंपनियों के साथ इसे एक्सपोर्ट करने की करार किए हैं। निर्यात के क्षेत्र में अपनी बेहतरीन गुणवत्ता के कारण मां दंतेश्वरी हर्बल की अच्छी साख बनी हुई है आते हो कई कंपनियां आगे आकर दमिश्क के गुलाब के उत्पादों की खरीद हेतु करार करने को तैयार हैं।