जगदलपुर। बस्तर की झीरम घाटी में नक्सलियों ने 25 मई 2013 को बड़ी वारदात को अंजाम दिया था। इसमें कांग्रेस के शीर्ष नेताओं सहित 31 लोगों की मौत हुई थी। उस झीरम घाटी में वर्ष 2017 के बाद से नक्सली बैकफुट पर नजर आ रहे हैं। झीरम घाटी में हमला करने वाले बड़े नक्सली नेता तो मारे गए जबकि कई नक्सली पुलिस के डर से पलायन कर गए हैं या जान से हाथ धोने के डर से सरेंडर कर चुके हैं। उक्त बातें बुधवार को बस्तर आइजी विवेकानंद सिन्हा ने कहीं।

बताया जा रहा है कि दो वर्षों में डीवीसीएम से लेकर एरिया कमेटी, प्लाटून कमांडर और अन्य कैडर के जहां बड़े नक्सली मारे गए हैं। साथ ही उनका नेतृत्व करने वाले नक्सली नेताओं की कमी होने के चलते नक्सली अब बैकफुट पर आ गए हैं।

नक्सलियों को इन दो वर्षों में काफी नुकसान का भी सामना करना पड़ा है, जिसका उल्लेख नक्सलियों ने अपने साहित्य में भी किया है। लीडरशिप करने वाला विलास उर्फ कैलाश भी पुलिस मुठभेड़ में मारा जा चुका है। किसी समय में बारसूर और मारडूम इलाकों में कैलाश का काफी दहशत था।