जगदलपुर। पूर्ववर्ती सरकार ने जो वन अधिकारी कानून बनाया और लागू किया गया है, उसकी व्याख्या सही न होने की वजह से कई पात्र परिवारों को इस कानून के दायरे में लाने के लिए अपात्र माना गया। इसकी व्याख्या में विसंगति की वजह से इसका सही लाभ लोगों को नहीं मिल पाया, चाहे वो आदिवासी हो या गैर आदिवासी। हमारी सरकार इस कानून की फिर से समीक्षा करेगी। ऐसे लोगों को भी कानून के दायरे में लाया जाएगा जो पात्रता रखते हैं।

इस कानून के लिए ऐसे परिवारों को पात्र माना गया है जो तीन पीढ़ी से किसी स्थान पर रहते हैं या 75 साल से किसी जगह पर रह रहे हैं। इसके साथ ही ऐसे परिवार ही इसके लिए पात्र माने जाएंगे जिनका कब्जा 13 दिसंबर 2005 के बाद का न हो। पूर्ववर्ती सरकार ने कानून के नियमों की गलत व्याख्या की।

इस वजह से कई परिवार इसके दायरे में नहीं आ पाए, जबकि कई अपात्र परिवारों को दायरे में लाया गया। इसके लिए 8 लाख आवेदन प्राप्त हुए थे, जिनमें से 4 लाख आवेदनों का ही निराकरण हो सका था। विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरणों में भी पुरानी व्यवस्था को बदला जाएगा।

पहले मुख्यमंत्री इसके अध्यक्ष हुआ करते थे, लेकिन अब स्थानीय विधायक को इस प्राधिकरण का अध्यक्ष बनाया जाएगा। सरकार राज्य में पंचायती राज को मजबूत बनाने के लिए भी नए कानून लाने की तैयारी कर रही है। इससे ग्राम पंचायतों की संवैधानिक संरचना को और मजबूती मिलेगी, साथ ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था और समाज का भी विकास होगा।

सीएम भूपेश बघेल ने आगे कहा कि बस्तर में पत्रकारों के साथ भी अन्याय हुआ है। छत्तीसगढ़ देश का ऐसा पहला राज्य है जहां पत्रकार सुरक्षा कानून बनाने का निर्णय लिया है। इसके लिए जल्द ही एक कमेटी गठित कर दी जाएगी। इस कमेटी में राष्ट्रीय स्तर के पत्रकारिता संगठनों के सदस्य, रिटायर्ड जस्टिस और बस्तर के पत्रकार शामिल होंगे।