जगदलपुर। बस्तर में चिटफंड कंपनियों द्वारा आदिवासियों को सब्जबाग दिखाकर करीब 300 करोड़ रूपए डकारे गए हैं। बावजूद इसके जिला स्तर पर इसकी जांच केे लिए गठित टीम केे पास महज 16 प्रकरणों की शिकायत ही मिली है। चिटफंड कंपनियों से लोगों को निवेश की राशि लौटाने तथा विधिक कार्रवाई के लिए जिला स्तर पर कलेक्टर की अध्यक्षता में टीम का गठन किया गया है। वहीं चिप्स के माध्यम से ऑनलाइन शिकायत की व्यवस्था की गई है।

बता दें कि बस्तर में एनएमडीसी द्वारा नगरनार एवं टाटा की ओर से लोहंडीगुड़ा क्षेत्र में स्टील प्लांट की योजना बनने के बाद प्रभावित ग्रामीणों के भूमि के एवज में उन्हें मिले मुआवजा की राशि में चिटफंड कंपनियों ने गिद्ध नजरें गड़ा रखी थीं।

लिहाजा बस्तर संभाग से ग्रीन रे इंटरनेशनल, गरिमा फाइनेंस, पल्स प्राइवेट लिमिटेड, रोजवेली, सांई प्रसाद आदि चिटफंड कंपनियों ने स्थानीय बेरोजगारों को भारी-भरकम कमीशन का लोभ देकर अपनी दुकानदारी शुरू की थी।

अधिकतर संस्थानों ने सेबी से ट्रेडिंग की अनुमति लेकर गैरकानूनी रूप से प्रशासन की आंख में धूल झोंककर लोगों को दस गुना राशि अधिक मिलने तथा महानगरों में आवासीय भूमि दिए जाने जैसे प्रलोभन देकर निवेश करवाए। एक निजी संगठन के सर्वे के अनुसार बस्तर में करीब 300 करोड़ रूपए विभिन्न कंपनियों ने निवेश करवाए थे। खाताधारक की परिक्वता अवधि होने के पहले ही उन्होंने यहां से बोरिया बिस्तर समेट लिया। लुटे हुए ग्राहकों ने एजेंट पर दबाव बनाए। कुछ एजेंटों ने आत्महत्या भी कर ली है।

राज्य में कार्रवाई पर बस्तर में सिफर

फर्जी चिटफंड कंपनियों के इस गोरखधंधे को खत्म करने में प्रशासन पूरी तरह नाकाम रहा। आर्थिक मामलों की एजेंसियां आरबीआई और सेबी के मुख्यालय में रपट भेजने तक ही प्रशासनिक कार्रवाई सीमित रही।

चिटफंड कंपनियों पर नकेल कसने के लिए सरकार ने विधेयक भी बनाया था जिसके तहत कंपनी के स्वामी को कारावास, भारी जुर्माना तथा संपत्ति कुर्क कर निवेशक को राशि लौटाने का प्रावधान शामिल है। राजधानी समेत दुर्ग व भिलाई में कुछ कंपनियों पर कठोर कार्रवाई भी की गई लेकिन बस्तर में इस प्रकार की कोई कार्रवाई होती नजर नहीं आ रही। पुलिस व प्रशासन सिर्फ खानापूर्ति ही कर रहे हैं।

16 लोगों ने की शिकायत

राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद चिटफंड कंपनियों के शिकार हुए लोगों को राहत पहुंचाने के लिए सरकार ने नई व्यवस्था की। कलेक्टर की अध्यक्षता में कोषालय अधिकारी समेत अन्य राजपत्रित अधिकारियों की टीम गठित की गई। साथ ही, जिला व जनपद स्तर पर ऑनलाइन शिकायत करने के लिए चिप्स के माध्यम से एप भी लांच किया गया। शिकायत सेल का नोडल आफिसर डिप्टी कलेक्टर को बनाया गया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार विस चुनाव के बाद से अब तक जिला कार्यालय के वित्त शाखा में पल्स कंपनी के विरूद्ध एक तथा अन्य कंपनियों के खिलाफ 15 मामले आए हैं। करीब नौ करोड़ रुपये के निवेश की शिकायत की गई है। सूत्रों के अनुसार बस्तर में 300 करोड़ से अधिक रकम नान बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों ने हजम किया है।

जांच चल रही

शिकायतों की जांच समिति के द्वारा की जा रही है। शिकायतकर्ता के खातों के सत्यापन समेत अन्य बिंदुओं पर जांच उपरांत प्रक्रिया अनुसार कार्रवाई की जाएगी। - गीता रायस्त, नोडल अधिकारी, चिटफंड शिकायत सेल