जगदलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। इन्द्रावती नदी के किनारे अंतिम संस्कार के लिए नगर निगम ने लाखों रूपए खर्च कर मुक्तिधाम विकसित किया है, परन्तु नदी किनारे फैली गंदगी को उठाने निगम के पास पर्याप्त सफाई कर्मी भी नहीं है। इधर मुक्तिधाम के गार्ड छन्नूराम मंडावी सेवाभाव से अपने एक साथी के साथ नदी किनारे फैली चिताओं की अधजली लकड़ियों को एकत्र कर जलाने का कार्य बीते छह महीने से करते आ रहे हैं। इसके लिए वे अतिरिक्त पारिश्रमिक भी नहीं लेते। उनका कहना है कि समाज हर संस्कार पवित्र स्थल पर करता आया है फिर किसी व्यक्ति की अंतिम यात्रा का दाह संस्कार गंदी जगह पर क्यों? इस धारणा के चलते ही स्वेच्छा से वे घाट की सफाई करते आ रहे हैं।

खड़कघाट के श्मशान घाट में पसरी गंदगी पर समाचार पत्रों में लगातार छपता रहता है, लेकिन नगर निगम लगातार सफाई कर्मचारियों की कमी बताकर नदी किनारे की वांच्छित साफ- सफाई नहीं करवा पा रही है। जिन सफाई कर्मियों को यहां तैनात किया गया है वे घाट के ऊपर शवदाह परिसर और घाट की सीढ़यिों की सफाई कर लौट जाते हैं। नदी किनारे दूर तक फैली चिताओं की अधजली लकड़ियों और कपड़ों को न तो दाह संस्कार करने वाले जलाने की कोशिश करते हैं न ही निगम के सफाई कर्मी।

शहर की सामाजिक संस्थाएं लगातार लोगों को मुक्तिधाम में स्वच्छता बनाए रखने की अपील करती आ रहीं है। वहीं कई स्थानों पर कचरा फेंकने कांक्रीट की टंकियां भी बनाई गई हैं परन्तु लोग अंतिम संस्कार के बाद बांस, कपड़ा आदि मुक्तिधाम परिसर और नदी किनारे ही फेंक कर चले जाते हैं। मुक्तिधाम के लिए नियुक्त सफाई कर्मी भी नदी किनारे की सफाई नहीं करते।

शहीद पार्क से मुक्तिधाम में स्थानांतरित किए गए निगम कर्मी छन्नूराम मंडावी छह महीने से यहां अपनी सेवाएं दे रहे हैं। वे प्रतिदिन नदी किनारे पड़ी चिताओं की अधजली लकड़ियों, कपड़ा आदि को एक जगह एकत्र करते हैं और इस पर मिट्टीतेल छिड़क कर आग लगा देते हैं। उन्होंने बताया कि वे मूलत: मुक्तिधाम के गार्ड हैं, सफाई करना उनका कार्य नहीं है, लेकिन मानवीयता के चलते वे यह कार्य नि:स्वार्थ भाव से करते आ रहे हैं। इस कार्य में खड़कघाट के कुछ सहयोगी भी उनकी मदद करते हैं।

पिछले छह महीने में वे करीब 30 बार अधजली लकड़ियों, कपड़ा आदि को एकत्र कर जला चुके हैं। यह कार्य वे आगे भी करते रहेंगे। दुर्गा चौक के युवक भी प्रति सप्ताह यहां आते हैं और श्रमदान कर मुक्तिधाम की सफाई करते हैं। उन्होने ही लोगों को आगाह करने यहां कई बोर्ड लगा रखे हैं परन्तु लोग हैं कि दिशा- निर्देशों का पालन ही नहीं करते।