जगदलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। इंद्रावती बचाओ आंदोलन के तहत पांच दिनों से चल रही जन जागरण इंद्रावती पदयात्रा रविवार को सुबह पुराना पुल पहुंची। पदयात्रियों ने खड़कघाट में बिखरे प्लास्टिक और झिल्लियों को एकत्र कर घाट की साफ-सफाई कर जल सत्याग्रह किया तथा विभिन्न समारोह में प्लास्टिक और पॉलिथीन की वस्तुओं से परहेज करने की शपथ ली। इस मौके पर शहरवासियों ने पदयात्रियों का आत्मीय स्वागत किया। सोमवार की सुबह यह पदयात्रा पुराना पुल से आगे बढ़ेगी।

बस्तर के लोगों को इन्द्रावती की दुर्दशा से वाकिफ कराने तथा उन्हें अपनी प्राणदायिनी के प्रति सजग करने के उद्देश्य से गत आठ मई से इन्द्रावती नदी में जन जागरण पदयात्रा निरंतर जारी है। बस्तर की सरहद से प्रारंभ हुई पदयात्रा अब तक करीब 23 किमी लंबी रही। रविवार सुबह छह बजे यह पदयात्रा भाठागुड़ा तुरेनार से प्रारंभ हुई और धोबीगुड़ा, आसना, डोगाघाट होते हुए पुराना पुल खड़कघाट पहुंची।

खड़कघाट की सफाई की गई

करीब साढ़े आठ बजे जैसे ही पदयात्री पुराना पुल पहुंचे और देखा कि खड़कघाट प्लास्टिक और पॉलिथीन कचरों से पटा हुआ है। सभी ने स्वेच्छा से घाट की साफ- सफाई की तथा कचरा को एकत्र कर नियत स्थान में फेंका। इस कार्य में पदयात्री महिलाओं और डिमरापाल आश्रम की बालिकाओं की भी महत्वपूर्ण भागीदारी रही।

जल सत्याग्रह कर ली शपथ

पदयात्री करीब नौ बजे इन्द्रावती नदी में उतरे और आधा घंटा तक दो फीट गहरे पानी में खड़े रहकर जल सत्याग्रह किया। इस मौके पर डॉ. पाण्डेय ने लोगों को शपथ दिलाई कि वे अपने घरों में आयोजित होने वाले किसी भी समारोह में प्लास्टिक और पॉलिथीन का उपयोग नहीं करेंगे वहीं जिस समारोह में प्लास्टिक और पॉलिथीन का उपयोग हो रहा होगा, वहां भोजन नहीं करेंगे।

पदयात्रियों का हुआ सम्मान

रविवार को जैसे ही करीब 165 पदयात्रियों का जत्था डोंगाघाट होते हुए पुराना पुल पहुंचा। शहरवासियों ने इनका खादी की माला से आत्मीय स्वागत किया। इस मौके पर पदयात्रा संयोजक किशोर पारख व दशरथ राम कश्यप ने कहा कि नदी किनारे जो यात्रा हो रही है। वह नदी के वास्तविक स्वरूप को देखने का बेहतर मौका भी है। नदी में आज जो पानी दिख रहा है वह एनीकट का है। नदी में प्राकृतिक रूप से बहाव बिल्कुल नहीं है, जबकि अभी आधी गर्मी बीती है और इंद्रावती की यह हालत है। हम सभी से निवेदन करते हैं कि वे अपने मित्रजनों को यह बतलाने की कोशिश करें कि उनकी इंद्रावती कितनी बदहाल है।

87 वर्षीय बुजुर्ग कर रहे नेतृत्व

इन्द्रावती बचाओ आन्दोलन के तहत गत पांच दिनों से चल रही जन जागरण पदयात्रा का नेतृत्व 87 वर्षीय डिमरापाल आश्रम के पद्मश्री धर्मपाल सैनी कर रहे हैं। जब शहर के पदयात्री प्रतिदिन सुबह पांच बजे पदयात्रा हेतु मां दंतेश्वरी मांदिर के सामने एकत्र हो रहे होते हैं, उसके पहले ही सैनी जी आश्रम की एक दर्जन बालिकाओं के साथ पदयात्रा के लिए जगदलपुर पहुंच चुके होते हैं। उन्होंने कहा कि बड़ी बात यह है कि इस अभियान में बच्चा से लेकर 87 साल का बुजुर्ग जुड़ा हुआ है। अभियान में महिलाओं की भागीदारी बेहतर है। मुझे ऐसा लगता है इस यात्रा से सभी जागेंगे और जो लोग अभी भी मौन हैं वे भी जल्द अपनी इंद्रावती के लिए मौन तोड़कर पदयात्रा और जन जागरण में शामिल होंगे।